Amit mishra (8115577137)
कई फर्म एसआईटी की रडार पर
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। राष्ट्रीय स्तर पर नशीले कफ सिरप के अवैध कारोबार पर एसआईटी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि शैली ट्रेडर्स ने दो सालो में लगभग 425 करोड़ रुपये की संदिग्ध लेनदेन किया है। इसको लेकर अभी तक 30 बैंक खाते फ्रीज और कई जिलों की मेडिकल फर्में जांच के घेरे में है। अब आपको बताते हैं इस पूरे रैकेट की गहराई, कौन-कौन फंसा, किस पर चला शिकंजा और एसआईटी की अब तक की कार्रवाई क्या कहती है।
जनपद के सदर कोतवाली में दर्ज नशीले कफ सिरप तस्करी केस की एसआईटी तेजी से कर रही है,जिसमे इस पूरे नेटवर्क की असल तस्वीर सामने आने लगी है। इस मामले की जांच का सबसे बड़ा केंद्र बना मुख्य स्टॉकिस्ट शैली ट्रेडर्स है। एसआईटी ने फर्म के चार्टर्ड एकाउन्ट विष्णु अग्रवाल को नोटिस देते हुए 10 दिसंबर तक सारे वित्तीय अभिलेख, बैंक स्टेटमेंट, लेजर, जीएसटी और दो साल में हुए सभी बड़े लेनदेन का पूरा हिसाब-किताब प्रस्तुत करने को कहा है। एसआईटी की जांच अब सीधे उस जगह पहुंच चुकी है जहां से पूरा नेटवर्क संचालित होता था लेकिन कहानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं होती है।
एसआईटी की पकड़ सोनभद्र से लेकर भदोही तक फैले एक बड़े चेन नेटवर्क तक जा पहुंची है अभी तक कि जांच में सामने आया है कि नशीले कफ सिरप के अवैध कारोबार में कई मेडिकल फर्में भी लिंक्ड हैं। मां कृपा मेडिकल स्टोर, शिविक्षा फर्म सोनभद्र, दिलीप मेडिकल एजेंसी और आयुष इंटरप्राइजेज भदोही, और राजेंद्र एंड संस ड्रग एजेंसी परसीपुर भदोही। इन सभी फर्मों को नोटिस भेजकर साक्ष्यों सहित एसआईटी के सामने उपस्थित होने को कहा गया है। शिविक्षा फर्म को अंकिता गुप्ता पत्नी विजय गुप्ता द्वारा संचालित किया जा रहा था और फर्म के भवन स्वामी को भी तलब किया गया है।
एसआईटी ने सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा वित्तीय जांच में पाया गया कि सिर्फ दो वर्षों में करीब 425 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन शैली ट्रेडर्स के खातों से हुआ है। इतना बड़ा ट्रांजेक्शन साफ इशारा करता है कि कफ सिरप तस्करी का यह नेटवर्क बेहद संगठित, बड़े पैमाने पर और प्रदेश से बाहर तक फैला हुआ था।
इसी आधार पर एसआईटी ने अब तक लगभग 30 बैंक खातों को फ्रीज किया है। इन खातों से करीब 60 लाख रुपये की राशि भी फ्रीज कराई जा चुकी है। एसआईटी की गहन विवेचना जारी है और जांच टीम अब इस पूरे ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, मेडिकल फर्मों, सप्लायर्स और उन चैनल्स की पहचान कर रही है जिनके जरिए अवैध कफ सिरप की खरीद-बिक्री होना बताया जा रहा है। पूरे प्रकरण में आगे और बड़े नाम सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।







