आजादी के 78 साल बाद भी हाशिये पर आदिवासी

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अभिषेक अग्रहरी

O- मालवाहक वाहनों में जान जोखिम में डालकर करते है सफर

ओबरा (सोनभद्र)। देश आज आजादी के आठ दशक पूरे करने की दहलीज पर खड़ा है, विकास और समावेशन की बड़ी-बड़ी योजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे कोसों दूर है। आदिवासी बहुल सोनभद्र, जिसे केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी जिलों की श्रेणी में रखा है, वहां आज भी सैकड़ों ग्रामीण बुनियादी परिवहन सुविधा से वंचित हैं।

ओबरा नगर पंचायत से सटे दर्जनों गांवों के आदिवासी ग्रामीण अपनी फसल बेचने, रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने और बाजार तक पहुंचने के लिए मजबूरन मालवाहक पिकअप वाहनों में सफर कर रहे हैं। हालात यह हैं कि 30 से 40 लोग एक ही वाहन में ठूंस दिए जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे मवेशियों को ढोया जाता है।

विकास के दावों के बीच असुरक्षित सफर

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विकास, सड़क सुरक्षा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचाने की बात कही जाती है, लेकिन ओबरा–परसाई और आसपास के इलाकों में ये दावे खोखले नजर आते हैं।
विडंबना यह है कि जिन मालवाहक वाहनों पर यातायात नियमों के तहत चालान काटा जाता है, वही वाहन इन ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा बने हुए हैं।

महंगे किराये, कम आमदनी

ओबरा से परसाई और अन्य गांवों तक के इस खतरनाक सफर के लिए ग्रामीणों से 40 से 100 रुपये तक किराया वसूला जाता है। दिनभर खेतों में मजदूरी कर मुश्किल से 200 रुपये कमाने वाले किसान और मजदूरों के लिए यह किराया भारी आर्थिक बोझ बन चुका है।
एक ओर महानगरों में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जैसी योजनाएं चल रही हैं, तो दूसरी ओर आदिवासी समाज के लोग आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं।

हादसों के बाद जागता है सिस्टम

इन पिकअप वाहनों के पलटने से आए दिन हादसे होते हैं, कई बार जानें भी चली जाती हैं। हादसे के बाद कुछ दिनों के लिए परिवहन और प्रशासनिक अमला सक्रिय दिखता है, लेकिन फिर वही ढर्रा लौट आता है। न नियमित बस सेवा, न वैकल्पिक परिवहन, सिर्फ आश्वासन।

सवालों के घेरे में ‘महत्वाकांक्षी जिला’

लगभग 80 वर्षों बाद भी अगर आदिवासी समाज सुरक्षित परिवहन जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। क्या महत्वाकांक्षी जिला केवल फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित रह गया है?
स्थानीय लोगों की मांग है कि ओबरा और आसपास के गांवों के लिए तत्काल सस्ती, नियमित और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था शुरू की जाए, ताकि आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

Leave a Comment

1347
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?