इमोशनल वेल बीइंग चार दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अमित मिश्रा

इमोशनल वेल बीइंग कार्यशाला में इमोशनल हुए शिक्षक

अब विधार्थी सामाजिक भावनात्मक शिक्षा पर स्वपूर्ण डायरी बनायेंगे, कार्यशाला का हुआ समापन

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। इमोशनल वेल बीइंग चार दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के सभागार में सफल समापन हुआ। कार्यशाला के अंत में शिक्षकों ने रोचक तरीक़े से एक–दूसरे को प्रमाणपत्र प्रदान किए और साझा किया कि वे स्वयं भी गहराई से प्रभावित हुए हैं तथा एक–दूसरे से बहुत कुछ सीख पाए हैं। अनेक शिक्षकों ने इसे अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यशालाओं में से एक बताते हुए कहा कि वे स्वपूर्ण से मिली सीख को अपने व्यक्तिगत जीवन में अपनाएँगे और छात्रों तक भी पहुँचाएँगे। उत्साहित शिक्षक अब जल्द से जल्द अपने विद्यालयों में ‘स्वपूर्ण’ कालांश के माध्यम से विद्यार्थियों के बीच यह पाठ्यक्रम ले जाने के लिए उत्सुक हैं।


स्वपूर्ण कालांश के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह दो राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की कक्षा 9 में सामाजिक‑भावनात्मक सीख, 21वीं सदी के कौशल तथा करियर जागरूकता पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएँगे। समग्र शिक्षा (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश एवं मेधा लर्निंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे Emotional Well-being for Government Schools कार्यक्रम के तहत माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए ‘स्वपूर्ण पाठ्यक्रम’ विकसित किया गया है, जिसमें सामाजिक‑भावनात्मक शिक्षा, 21वीं सदी के कौशल और करियर जागरूकता जैसे तीन प्रमुख यूनिट शामिल हैं।


इमोशनल वेल बीइंग कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए समग्र शिक्षा माध्यमिक, लखनऊ के पीएएमओयू सदस्य तथा मेधा लर्निंग फाउंडेशन से जुड़े ललित जोशी ने बताया कि नवीन शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यालयों में सामाजिक‑भावनात्मक माहौल तैयार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इसी उद्देश्य से स्वपूर्ण पाठ्यक्रम के माध्यम से किशोर विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को समझने, उन्हें स्वस्थ तरीक़े से अभिव्यक्त करने और अपने भविष्य को सार्थक रूप से आकार देने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
सोनभद्र जनपद के 45 शिक्षकों ने इस चार दिवसीय ग़ैर‑आवासीय प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने स्वपूर्ण पाठ्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास किया, कक्षा में सामाजिक‑भावनात्मक वातावरण बनाने, समूह में गतिविधियाँ संचालित करने तथा विद्यार्थी डायरी के माध्यम से बच्चों की अभिव्यक्तियों को स्थान देने के तरीक़े सीखे, ताकि विद्यार्थी एक संवेदनशील और ज़िम्मेदार नागरिक बनते हुए अपने करियर का निर्माण कर सकें।


इस कार्यशाला का संचालन ललित जोशी, अंकित पटेल एवं डॉ. अजय यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन ज़िला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह के निर्देशन में तथा समस्त व्यवस्थाएँ ज़िला समन्वयक अरविंद सिंह चौहान द्वारा सुनिश्चित की गईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1543
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?