पत्थर खदान मे टिपर पलटी, चालक की दबकर हुई मौत

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अमित मिश्रा

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में डाला-बारी और बिल्ली-मारकुंडी डोलो स्टोन की पत्थर खदाने मौत का कुंआ बन चुकी है ,जहां आये दिन आदिवासी मजदूरों की मौत पर खनन व्यवसायी सौदा करते है। इन खदानों पर खनिज विभाग और डीजीएमएस का कोई नियंत्रण नही होता क्योंकि पट्टाधारकों से यह लोग पोषित होते रहते है।

बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्रों में एक बार फिर लापरवाही की वजह से एक आदिवासी व्यक्ति की जिन्दगी छीन ली है। घटना ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी स्थित आराजी नम्बर 2751 अजन्ता मिनरल्स के खनन क्षेत्र में एक टीपर अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई जिसमे टीपर चालक की दबकर घायल हो गया,जिसे मौजूद अन्य श्रमिको द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया जहां चिकित्सक ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। वही इस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी पत्थर खदान इलाके के आराजी नम्बर 2751 अजंता मिनरल माइनिंग में बोल्डर लोड करने टिपर लेकर गए  कैलाश गौड़ पुत्र शिवदास गौड़ (40 वर्ष) निवासी खैराही थाना ओबरा की अनियंत्रित होकर टीपर पलट गई। जिससे टिपर चालक कैलाश
बुरी तरह घायल हो गए ,जिन्हें मौके पर मौजूद श्रमिको ने अस्पताल पहुंचाया जहाँ चिकित्सको ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया।

वही घटना को लेकर जानकारी देते हुए मृतक के भाई राजा बाबू ने बताया कि खदान पर गए थे  इस दौरान एक दूसरी टीपर ने टक्कर मार दी। मृतक मेरा भाई टीपर का चालक था और  हम लोग खुद भी चालक हैं। खदान के ऊपर में लोडिंग कर रहे थे और हम नीचे खदान में मौजूद थे।

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