चंदौली जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र में भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं ने वन विभाग की कथित मनमानी और उत्पीड़न के खिलाफ सोमवार को जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग बड़े वन भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहा है, जबकि वनवासियों और परंपरागत रूप से रह रहे गरीब-आदिवासी परिवारों की पुस्तैनी जमीन पर कार्रवाई की जा रही है।
धरना-प्रदर्शन की शुरुआत दुर्गा मंदिर पोखर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के एकत्र होने से हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए नौगढ़ रेंज कार्यालय तक जुलूस निकाला। प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा माले के राज्य स्थायी समिति सदस्य एवं चंदौली जिला सचिव कामरेड अनिल पासवान ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए कामरेड अनिल पासवान ने कहा कि वन विभाग मनमाने तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा वनवासियों, दलितों, गरीबों, आदिवासियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों की पुस्तैनी जमीन पर गड्ढे खोदे जा रहे हैं तथा उनके मकान-झोपड़ियों को गिराया जा रहा है, जबकि बड़े वन भू-माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
इस मौके पर भाकपा माले के जिला स्थायी समिति सदस्य एवं नौगढ़ ब्लॉक प्रभारी कामरेड पतालू गोंड ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तहसील क्षेत्र से जुड़े वन अधिकार, बेदखली और उत्पीड़न जैसे तमाम मुद्दों को लेकर यह आंदोलन किया गया है। प्रदर्शन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए आदिवासी, वनवासी और परंपरागत वन भूमि पर रह रहे लोग बड़ी संख्या में शामिल रहे।

प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर डीएफओ रविशंकर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई।
वहीं, वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ संजय श्रीवास्तव ने लगाए गए आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि बेदखली की जो भी कार्रवाई की जा रही है, वह सभी पर समान रूप से लागू की जा रही है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास वैध अधिकार हैं, वे कानून के तहत उप जिलाधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।
धरना-प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए जयमोहनी रेंज कार्यालय परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा, हालांकि बाद में ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।







