अमित मिश्रा
कोन (सोनभद्र) । एक ओर जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर करोड़ों की योजनाएं चला रही है, वहीं सोनभद्र जनपद का कोन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अपनी बदहाली पर आज भी आंसू बहा रहा है। लगभग एक लाख से अधिक की जनसंख्या वाले कोन क्षेत्र में स्थित इस स्वास्थ्य केन्द्र की हालत विगत कई वर्षों से जस की तस बनी हुई है।
इस स्वास्थ्य केन्द्र में न तो एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही बिजली और शुद्ध पेयजल (आरओ) की व्यवस्था। यहां तक कि रोगियों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड भी नहीं हैं। इन मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में स्थानीय आदिवासी और गरीब मरीजों को अक्सर निजी और मानकविहीन अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है, जिससे आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दोनों ही संकट गहराते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आकांक्षी जनपद के नाम पर योजनाएं भले ही कागजों पर चल रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। कोन क्षेत्र के आसपास लगभग 10 किलोमीटर की परिधि में यही एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है, लेकिन यहां रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवा का कोई प्रबंध नहीं है। रात में दुर्घटना, डिलीवरी या किसी आकस्मिक रोग की स्थिति में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान में केन्द्र पर मात्र दो स्थायी चिकित्सक, एक प्रशिक्षु चिकित्सक और दो स्टाफ नर्स कार्यरत हैं। लेकिन रात्रिकालीन पाली में किसी की भी ड्यूटी निर्धारित नहीं है, जिससे आपातकालीन मामलों में स्थानीय जनता को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
अपना दल (एस) के प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद पटेल ‘दयालु’ सहित क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित मंत्रीगणों को इन समस्याओं से अवगत कराया, परंतु अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
स्थानीय लोगों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से मांग की है कि कोन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शीघ्र आवश्यक सुविधाएं बहाल की जाएं और रात्रिकालीन चिकित्सकीय सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र के गरीब व आदिवासी वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।







