अमित मिश्रा
30-32 परिवारों के आवागमन का एकमात्र रास्ता बदहाल, ग्रामीणों के साथ नाले में उतरकर युवा नेता दीपू शर्मा ने किया प्रदर्शन।
सोनभद्र₹उत्तर प्रदेश)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते है तो वही सूबे मुखिया योगी आदित्यनाथ प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को 01 ट्रिलियन डॉलर तक पहुचाने का दावा करते है लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ ही और बयां करती है कि नीति आयोग द्वारा चयनित अति पिछड़ा जनपद में विकसत विकास खंड चोपन के अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा में आज भी लगभग 30-32 परिवार सड़क और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। आज यहाँ के स्कूली बच्चे जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे है कि आवागमन का एकमात्र रास्ता वर्षों से बदहाल है, लगभग 3 किलोमीटर संपर्क मार्ग का निर्माण नहीं होने और बीच में पड़ने वाले नाले पर पुलिया न होने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात के दिनों में नाला उफान पर होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
इस गंभीर जनसमस्या को लेकर युवा नेता दीपू शर्मा ने ग्रामीणों के साथ नाले में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन का ध्यान गुलरिहवा की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान आठवीं कक्षा की छात्रा खुशी कुमारी ने जिलाधिकारी से भावुक अपील करते हुए कहा कि साहब, हमारे गांव में सड़क और पुलिया बनवा दीजिए, ताकि हम बच्चे बिना किसी परेशानी और डर के स्कूल आ-जा सकें। छात्रा की इस गुहार ने ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया।
वहीं, आठवीं कक्षा के छात्र विनय कुमार ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि पिछले बरसात में स्कूल से घर लौटते समय वह नाले के तेज बहाव में बहकर कुछ दूर चला गया था। गनीमत रही कि उसके साथियों ने साहस दिखाते हुए उसे बचा लिया। यह घटना बताती है कि सड़क और पुलिया के अभाव में यहां के बच्चों की जान हर समय जोखिम में रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर सबसे बड़ी समस्या मरीज को अस्पताल पहुंचाने की होती है। बरसात में नाले का जलस्तर बढ़ जाने पर लोग इस पार से उस पार तक नहीं जा पाते। महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी महोदय से सड़क एवं पुलिया निर्माण की गुहार लगाई।
इस अवसर पर युवा नेता दीपू विजय शर्मा ने कहा कि यह केवल एक सड़क या पुलिया का मामला नहीं है, बल्कि 30-32 परिवारों के जीवन, बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी ग्रामीणों को अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आखिर विकास की योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम छोर पर बसे इन परिवारों तक कब पहुंचेगा?
उन्होंने जिलाधिकारी महोदय से मांग की कि ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा में लगभग 3 किलोमीटर संपर्क मार्ग का निर्माण कराया जाए तथा नाले पर प्राथमिकता के आधार पर पुलिया बनवाई जाए, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
दीपू शर्मा ने कहा कि जब एक आठवीं कक्षा की छात्रा को अपने स्कूल जाने के लिए जिलाधिकारी से गुहार लगानी पड़े, तो यह केवल उस गांव की नहीं, बल्कि हमारी विकास व्यवस्था की गंभीर तस्वीर है। गुलरिहवा के ग्रामीण भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने के हकदार हैं। उनकी समस्या का समाधान अब और विलंबित नहीं होना चाहिए।









