खड़िया परियोजना विस्तार पर ग्रामीणों की आपत्ति, 12 हजार आबादी के विस्थापन की मांग उठी

IMG 20261028 WA0006
IMG 20261028 WA0006

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

चिल्काडांड के ग्रामीणों ने लोक सुनवाई में दर्ज कराई आपत्ति, ओबी पहाड़ से भू-स्खलन का खतरा; 2012 के DM आदेश के अनुपालन की मांग

म्योरपुर (सोनभद्र)। एनसीएल की खड़िया ओपन कास्ट कोयला परियोजना की उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 20 MTPA किए जाने के प्रस्ताव पर ग्राम चिल्काडांड के ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है। गांव निवासी पंकज कुमार ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित लोक सुनवाई के संदर्भ में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के माध्यम से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र देकर लगभग 12 हजार निवासियों की सुरक्षा और समयबद्ध विस्थापन-पुनर्वास की मांग की है।
आपत्ति पत्र में कहा गया है कि ग्राम चिल्काडांड में वर्ष 1976-77 के दौरान एनटीपीसी सिंगरौली परियोजना से विस्थापित परिवारों को बसाया गया था। वर्तमान में गांव एनसीएल खड़िया परियोजना की खनन गतिविधियों, विशाल ओवरबर्डन (ओबी) पहाड़, ब्लास्टिंग, धूल और प्रदूषण के बीच रहने को विवश है।
बस्ती से 50 मीटर दूर ओबी पहाड़, भू-स्खलन की आशंका
आवेदन के अनुसार गांव से महज 50 से 200 मीटर की दूरी पर ओबी पहाड़ स्थित है। ग्रामीणों ने इसकी ऊंचाई, ढलान और स्थिरता का स्वतंत्र तकनीकी सर्वेक्षण कराने की मांग की है। वर्षा के दौरान मिट्टी-मलबे के कटाव और जल बहाव से सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। ग्रामीणों ने कहा है कि माइंस क्लोजर के बाद भी ओबी पहाड़ की स्थिरता, भूमि कटाव और भू-स्खलन का खतरा बना रहेगा, इसलिए बंदी प्रक्रिया के दौरान ही वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।
2012 के जिलाधिकारी के आदेश का मुद्दा
पत्र में वर्ष 2012 में एक घटना के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कराई गई संयुक्त जांच और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के निर्देशों का उल्लेख किया गया है। आवेदक ने आदेश की प्रति संलग्न करते हुए प्रशासन से अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने और इतने वर्षों बाद भी पुनर्वास पूरा न होने पर सवाल उठाया है। एनसीएल, एनटीपीसी और जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक कर पुनर्वास की जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने की मांग की गई है।
ब्लास्टिंग से मकानों में दरार, प्रदूषण की शिकायत
ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग से कंपन,मकानों में दरारें, खिड़की-दरवाजों पर असर और धूल-प्रदूषण की शिकायत की है। स्वतंत्र स्वास्थ्य सर्वेक्षण और पीएम10, पीएम2.5 की नियमित निगरानी कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रखी गई है।
चार प्रमुख मांगें सुरक्षित स्थान पर समयबद्ध पुनर्वास,माइंस क्लोजर समिति के समक्ष प्राथमिकता से समीक्षा, ओबी पहाड़ की स्थिरता एवं भू-स्खलन का स्वतंत्र तकनीकी आकलन, उत्पादन विस्तार पर पुनर्विचार और प्रक्रिया स्थगित रखना
आवेदक ने एनजीटी के समक्ष लंबित पर्यावरणीय मामलों का संदर्भ देते हुए कहा कि औद्योगिक विकास के साथ प्रभावित आबादी के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा भी जरूरी है।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1554
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?