चेयरमैन जगदीश सिंह पटेल बोले- पटेल न होते तो अखंड भारत संभव न होता
सोनभद्र। भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में बुधवार से 31 अक्टूबर तक आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नेतृत्व में जिला कार्यालय, सोनभद्र में ‘सबसे ऊँचे सरदार’ विषय पर गोष्ठी सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि जिला सहकारी बैंक मिर्जापुर चेयरमैन जगदीश सिंह पटेल रहे। गोष्ठी का शुभारंभ पं. दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नंदलाल और संचालन जिला महामंत्री अशोक कुमार मौर्या ने किया।
मुख्य अतिथि जगदीश सिंह पटेल ने कहा कि 1947 में आजादी के समय लगभग 565 रियासतें थीं। अंग्रेजों ने उन्हें भारत में मिलने या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया था, जो देश के टुकड़े होने का गंभीर खतरा था। सरदार पटेल ने वीपी मेनन के सहयोग से साम-दाम और दृढ़ निश्चय की नीति अपनाकर अधिकांश रियासतों को शांतिपूर्वक भारतीय संघ में मिलाया। जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी चुनौतीपूर्ण रियासतों के विलय में उनकी निर्णायक भूमिका रही। हैदराबाद में सितंबर 1948 में ऑपरेशन पोलो उसी दृढ़ता का उदाहरण है। यदि सरदार पटेल न होते तो आज एकजुट और अखंड भारत हमारे सामने न होता। भाजपा का स्पष्ट मत है कि लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकारों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते पटेल के योगदान को कम आंका।
जिलाध्यक्ष नंदलाल ने कहा कि सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाद गांव में किसान परिवार में हुआ था। वे जीवन भर किसान, मजदूर और ग्रामीण भारत की आवाज बने रहे। खेड़ा सत्याग्रह 1918 और बारदोली सत्याग्रह 1928 में किसानों का नेतृत्व किया, बारदोली की सफलता के बाद उन्हें सरदार की उपाधि मिली। स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक नींव मजबूत की और अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई।
इस मौके पर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रामलखन सिंह, जिला महामंत्री संतोष शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष बृजेश श्रीवास्तव, जिला मंत्री अनिल सिंह, ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष निशांत कुशवाहा, जिला सह मीडिया प्रभारी अमन मौर्या सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।









