मेहनतकश को मिले देश के संसाधनों में अधिकार: दिनकर कपूर

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ओबरा, सोनभद्र। आर्टिफिशियल इंटेलेंस (एआई) से देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी और इस समय कार्यरत बहुत सारे लोग नौकरियों से हाथ धो बैठेंगे। ऐसी स्थिति में लोगों की आजीविका की सुरक्षा के लिए देश के संसाधनों में मेहनतकशों के अधिकार को सुनिश्चित करना होगा। यह बातें आज ओबरा में आयोजित ठेका मजदूर यूनियन के 23 वें जिला सम्मेलन में मुख्य वक्ता पूर्व श्रमबंधु दिनकर कपूर ने कही। उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों पर चुनिंदा पूंजी घरानों का कब्जा हो गया है। देश में असमानता आजादी से पूर्व से भी ज्यादा बढ़ गई है। देश की आय भी कुछ लोगों के हाथ में संकेन्द्रित होती जा रही है। जो संविधान के अनुच्छेद 39 का पूर्णतया उल्लंघन है। आज कॉर्पोरेट-हिंदुत्व-राज्य का संश्रय मजदूर, किसान, आम जनता के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला कर रहा है। ऐसी स्थिति में सिर्फ मांग और पूर्ति आधारित ट्रेड यूनियन आंदोलन नहीं बल्कि मेहनतकशों का एक राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है। उम्मीद है कि यह सम्मेलन इस दिशा में आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के हाल में आए निर्णय जिसमें कहा गया कि न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी तो मलिक काम नहीं देगें और ट्रेड यूनियनों के कारण उद्योग बंद हुए हैं, पर बात रखते हुए दिनकर कपूर ने कहा कि दरअसल पूंजीपतियों के उत्पादन को जारी रखने के लिए श्रम शक्ति की नितांत आवश्यकता है। न्यूनतम मजदूरी इस श्रम शक्ति के जिंदा रहने की अनिवार्य शर्त है। यदि यह भी लोगों को नहीं मिला तो आने वाले समय में उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों ने नहीं बल्कि सरकारों ने पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए सरकारी उद्योगों को बंद किया या बेचा है। प्रदेश में बिजली क्षेत्र का निजीकरण इसका ताजा तरीन उदाहरण है। इसके खिलाफ लड़ने वाले बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का बर्बर दमन इस सरकार में किया गया है। सम्मेलन में मंत्री तेजधारी गुप्ता ने रिपोर्ट रखी। इसमें कहा गया कि लेबर कोड आधुनिक गुलामी के दस्तावेज हैं। इन कोडो में 200 साल के संघर्षों से हासिल काम के घंटे 8 को बढ़ाकर 12 कर दिया गया है। फिक्स टर्म इम्पलाइमेंट लाकर जो थोड़ी बहुत सामाजिक सुरक्षा मजदूरों को थी वह भी छीन ली गई। फ्लोर लेवल वेज न्यूनतम मजदूरी से भी कम दर पर तय की गई है। ट्रेड यूनियन बनाने और प्रतिवाद दर्ज करने का लोकतांत्रिक अधिकार खत्म कर दिया गया है। सर्वोपरि श्रम विभाग की एनफोर्समेंट की शक्ति को खत्म कर फैसिलिटेटर बना दिया गया है, जिससे आने वाले समय पर मजदूरों को न्यूनतम राहत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रदेश में 10 सालों से न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन नहीं हुआ है। हालत इतनी बुरी है कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद जनपद के तमाम खतरनाक श्रेणी के उद्योगों में अभी भी मजदूरों को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं। पूरी जिंदगी उद्योग में देने वाले 60 साल की उम्र में रिटायर हो रहे मजदूरों को ग्रेच्युटी तक की सुविधा नहीं दी जाती है। इस पर पूरे जिले में जन संवाद अभियान चलाने और मजदूरों को जागरूक करने का निर्णय भी सम्मेलन में लिया गया। सम्मेलन में वार्षिक चुनाव संपन्न हुआ। जिसमें सर्वसम्मत से तीरथराज यादव को जिला अध्यक्ष और तेजधारी गुप्ता को जिला मंत्री चुना गया। इसके अलावा मंगरु प्रसाद श्याम को उपाध्यक्ष, मोहन प्रसाद को संयुक्त मंत्री, शेख इम्तियाज को प्रचार मंत्री, अंतलाल खरवार को कार्यालय मंत्री और इंद्रदेव खरवार को कोषाध्यक्ष चुना गया और 15 सदस्यी कार्यकारिणी का भी चुनाव हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष कृपाशंकर पनिका ने की।

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