सपा प्रतिनिधि मण्डल के सदस्य सांसद जिया उर रहमान को पुलिस ने बरेली जाने से रोका

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

मुज्जमिल दानिश

बरेली घटना को लेकर सपा द्वारा 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल को हालात का जायजा लेने  जाना था बरेली

सम्भल(उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा बरेली घटना को लेकर गठित 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल में शामिल सांसद जिया उर रहमान को जनपद पुलिस ने बरेली जाने से रोक लिया। इनको रोकने के लिए जनपद के तीन थानों की फोर्स मौके पर मौजूद रही। वही सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एहतियाती इंतज़ाम किए। एमपी जिया-उर-रहमान बरेली जाने के लिए निकले थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया जिसमे तीन थानो सदर, सिविल लाइंस और बिथरी चैनपुर — की पुलिस मौके पर तैनात रही। वही पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हालात सामान्य हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। फिलहाल एमपी जिया-उर-रहमान को पुलिस निगरानी में रखा गया है और हालात पर प्रशासन की पैनी नज़र बनी हुई है।

बरेली जाने से रोकने पर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के रूप में एमपी जिया उर रहमान ने अपनी प्रतिक्रिया पत्रकारों के समक्ष खुलकर रखा।


प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने पर: समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान ने कि पार्टी प्रमुख के निर्देश पर समाजवादी पार्टी की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को बरेली भेजा जा रहा था। लेकिन, पुलिस प्रशासन और सरकार द्वारा वहां पाबंदी लगा दी गई, और प्रतिनिधिमंडल को रोकने का आदेश जारी कर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल को रोकने के लिए धारा 163 (संभवतः धारा 144 का गलत संदर्भ या कोई स्थानीय आदेश) का हवाला दिया गया, जिसके तहत किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को वहां नहीं जाने देने का फैसला लिया गया है। उन्होंने प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठाया कि अगर पुलिस और शासन की मंशा साफ है, तो उन्हें जाने से क्यों रोका जा रहा है?


प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य: प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य वहां के हालात को समझना और दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों से मिलकर एक रिपोर्ट बनाना था। यह रिपोर्ट वे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपकर, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कदम बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल का मकसद वहां जाकर माहौल खराब करना या लोगों को भड़काना नहीं था, बल्कि सिर्फ लोगों की बात सुनकर उसे अखिलेश यादव जी तक पहुंचाना था।

मौलाना तौकीर रजा पर आरोप और प्रतिक्रिया: मौलाना तौकीर रजा पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा के साथ-साथ 81 लोगों को जेल में डाला गया है और 10 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जो कि गलत है। उन्होंने साफ किया कि उनका मतलब यह नहीं है कि देश में कानून तोड़ने की आजादी है, कानून तोड़ने वाले को सजा मिलनी चाहिए।
हालांकि, उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह सवाल किया कि जब लोग एक मेमोरेंडम (ज्ञापन) के रूप में जिलाधिकारी के माध्यम से अपनी पीड़ा राष्ट्रपति को सौंपना चाहते थे तो उसे ले लिया जाता।
उन्होंने प्रशासन के उस आरोप को गलत बताया कि वहां के लोगों ने पत्थर चलाए, गोली चलाई, या पुलिस अधिकारियों के हथियार छीनने का प्रयास किया, और सवाल किया कि अगर ऐसा हुआ था तो पुलिस ने अभी तक कोई फोटो या वीडियो क्यों वायरल नहीं किया।

आगे की योजना: उन्हें आज प्रतिनिधिमंडल के साथ जाने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि वह कानून को तोड़ने वाले व्यक्ति नहीं हैं और कानून के तहत ही चलना चाहते हैं।
उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि उन्हें अकेले ही जाने की अनुमति दे दी जाए, अगर प्रतिनिधिमंडल से कोई दिक्कत है।
अगर उन्हें अनुमति मिलती है तो वे जरूर जाएंगे। अगर अनुमति नहीं मिलती है, तो जब धारा 163 (या 144) वहां से हटेगी, तब पार्टी की तरफ से वे प्रतिनिधिमंडल के रूप में फिर से जाकर लोगों के बीच उनकी पीड़ा सुनेंगे।

Leave a Comment

1348
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?