कचरे के ढेर से ओबरा नगर पंचायत के रहवासियों का जनजीवन बेहाल

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रेंगेश सिंह (9125315735)

O- स्वच्छता अभियान को लगा करारा झटका, रहवासियों ने उठाई आवाज

ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा नगर पंचायत की लापरवाही अब लोगों की ज़िंदगी पर भारी पड़ रही है। पूरे नगर का कूड़ा ट्रॉली से उठाकर आबादी वाले क्षेत्र, ओबरा तापीय परियोजना की ज़मीन, सेक्टर-9 मार्ग के किनारे फेंका जा रहा है। इसमें प्लास्टिक सहित तमाम तरह का कचरा शामिल होता है, जिससे उठती दुर्गंध और धुएं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह इलाका घनी आबादी और स्कूलों से घिरा हुआ है। रोज़ाना स्कूल जाने वाले बच्चे, राहगीर, वाहन चालक, यहां तक कि आवारा गायें भी इस गंदगी से प्रभावित हो रही हैं। अक्सर देखा गया है कि कूड़े के ढेर में आग भी लगा दी जाती है, जो दिन-रात सुलगता रहता है और इससे उठता धुआं पूरे वातावरण को जहरीला बना रहा है।

हवा के साथ उड़ता कचरा सड़क पर फैल रहा है, जिससे रास्ते से गुजरने वाले लोगों को रुमाल से नाक ढकनी पड़ रही है। यहां तक कि प्लास्टिक खा रही गायें बीमारी की चपेट में आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कूड़ा न केवल दुर्गंध फैला रहा है, बल्कि वायु प्रदूषण और संक्रामक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा रहा है।

नगर के अंदरूनी मोहल्लों की हालत और भी बदतर है, जहां कचरे की बदबू के बीच लोगों को रहना मजबूरी बन चुकी है। शहर के अधिकतर मोहल्लों में पर्याप्त कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण लोग कहीं भी कचरा फेंकने को मजबूर हैं। इससे स्वच्छ भारत अभियान की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वे इस समस्या पर तुरंत संज्ञान लें और आबादी क्षेत्र में कूड़ा डंपिंग पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत की यह कार्यशैली न केवल स्वच्छता नियमों की अनदेखी है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दुर्गंध और प्रदूषण के इस गहराते संकट से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं। फिलहाल तो ओबरा की फिज़ा में सिर्फ़ कचरे की सड़ांध और नगर पंचायत की बेरुख़ी तैर रही है।

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