सीएमओ की मेहरबानी से संविदा चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई ठप, क्षेत्रीय जनों में आक्रोश

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अमित मिश्रा

O- केकराही पीएचसी में नियमों को ताक पर रखकर संविदा डॉक्टर की तैनाती, मरीजों से सौतेला व्यवहार बना चर्चा का विषय

केकराही (सोनभद्र) । करमा विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही में नियुक्त संविदा चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार मौर्य एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। बहुआरा के लिए नियुक्त डॉ. मौर्य वर्षों से केकराही पीएचसी पर जमे हुए हैं और उनका रवैया लगातार विवाद का कारण बन रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के बावजूद न तो इन्हें मूल तैनाती स्थल भेजा जा रहा है और न ही इनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई हो रही है।

21 जुलाई को एक बार फिर इनके व्यवहार ने विवाद को जन्म दे दिया, जब कसया कला गांव निवासी अनूप विश्वकर्मा अपने बेटे मनीष के इलाज के लिए केकराही पीएचसी पहुंचे। डॉक्टर मौर्य ने सीबीसी जांच के लिए पर्ची लिखते हुए कहा कि अस्पताल की मशीन खराब है और सामने सोनभद्र पैथोलॉजी से जांच कराएं। जब मरीज के परिजन ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं और वे किसी अन्य सस्ती पैथोलॉजी में जांच कराना चाहते हैं, तो डॉक्टर नाराज हो गए और उनके साथ सौतेला व्यवहार करने लगे।

यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कसया कला के ओमप्रकाश, पापी गांव के रामजी और बैजनाथ तथा बसदेवा गांव के रमेश प्रसाद के साथ इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। जब डॉक्टर मौर्य से इस विषय में बात की गई, तो पहले उन्होंने इनकार किया, लेकिन जब मरीज के परिजन से फोन पर बात करवाई गई तो घबरा गए और बोले कि उन्हें ख्याल नहीं आ रहा है। पिछली घटनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आगे ध्यान रखा जाएगा।

क्षेत्रीय जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर मौर्य को मूल तैनाती स्थल बहुआरा क्यों नहीं भेज रहे? क्या प्रशासनिक मजबूरी है या कोई विशेष संरक्षण?

इस पूरे मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी ललितेश मिश्रा और दीपक दुबे ने सीएमओ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए चेतावनी दी है कि यदि डॉ. मौर्य को तत्काल बहुआरा नहीं भेजा गया, तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

जब इस मामले में सीएमओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका मोबाइल नहीं रिसीव हुआ। इससे नाराजगी और संदेह और भी गहराता जा रहा है।

जनता की मांग है साफ: संविदा डॉक्टर को मूल तैनाती स्थल भेजा जाए और मरीजों के साथ हो रहे भेदभाव पर तत्काल रोक लगे।

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