शिक्षा पर आघात, महापुरुषों का अपमान नहीं सहेगी सरदार सेना

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अमित मिश्रा

O- कंगना के बयान पर भड़की सरदार सेना, योगी सरकार से शिक्षानीति में सुधार की मांग, कहा– “बिलों को सुधारे, वरना हम सुधार देंगे

सोनभद्र । राज्य और राष्ट्र में शिक्षा और महापुरुषों के सम्मान को लेकर उभरे विवादों के बीच मंगलवार को सरदार सेना ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर जनमानस की आवाज को बुलंद किया। प्रदर्शन के माध्यम से सरदार सेना ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि शिक्षा और समाज के मुद्दों पर तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सरदार सेना के जिला अध्यक्ष अमरेश कुमार ने बताया कि यह विरोध प्रदेश भर में सरदार सेना प्रमुख डॉ. आर. एस. पटेल के निर्देश पर एक साथ आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में एक ही समय पर ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें तीन सूत्रीय तथा 4.5 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।

सरदार सेना ने भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा राष्ट्र निर्माता लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर दिए गए विवादित बयान को राष्ट्र का अपमान बताया। संगठन के नेताओं ने कहा कि यह टिप्पणी केवल सरदार पटेल नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वाभिमान और संविधान निर्माता सोच पर हमला है। कंगना द्वारा यह कहना कि सरदार पटेल को अंग्रेजी नहीं आती थी इसलिए वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, न सिर्फ अशोभनीय है बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना भी है। सरदार सेना ने इसे देश की अस्मिता पर चोट बताते हुए कहा कि भाजपा को अपनी दोहरी राजनीति बंद करनी चाहिए, जिसमें एक तरफ वोट के लिए महापुरुषों का नाम लिया जाता है और दूसरी तरफ उनके विरुद्ध अपमानजनक बातें कहने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

प्रदर्शन में वक्ताओं ने भाजपा से मांग की कि यदि पार्टी वास्तव में सरदार पटेल का सम्मान करती है तो कंगना रनौत के खिलाफ तत्काल राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए, उनकी संसद सदस्यता रद्द की जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सरदार सेना सड़कों पर उतरकर व्यापक जन आंदोलन खड़ा करेगी।

वहीं शिक्षा को लेकर सरदार सेना ने योगी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। डॉ. आर. एस. पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पांच हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों को बंद करने का निर्णय तुगलकी फरमान की तरह है, जो सीधे-सीधे गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग के बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर हमला है। उन्होंने कहा कि यह आदेश सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने की दिशा में एक खतरनाक कदम है, जो संविधान के अनुच्छेद 21-ए का सीधा उल्लंघन है। सरदार सेना ने साफ कहा कि यह हमला लौहपुरुष सरदार पटेल के विचारों और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की आत्मा पर प्रहार है।

प्रदर्शन में रजनीश गंगवार नामक शिक्षक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी अन्यायपूर्ण करार दिया गया। सरदार सेना ने कहा कि कांवड़ मत लाना, ज्ञान का दीप जलाना जैसे शिक्षा प्रेरक गीत पर मुकदमा दर्ज करवाना यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा से ज्यादा अंधश्रद्धा को बढ़ावा देना चाहती है। यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

सरदार सेना ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ और महापुरुषों का अपमान बंद नहीं हुआ, तो संगठन प्रदेशव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगों को स्पष्ट करते हुए सरदार सेना ने सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है, अन्यथा “बिलों को हम सुधार देंगे” जैसी चेतावनी दी गई है, जो उनकी गंभीरता को दर्शाता है।

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