22 साल उर्मिला जैसा साहस पत्नी वनवास समाप्त, बेटे को देख बूढ़े पिता के आँखों से छलके आँसू

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अमित मिश्रा

O- 22 साल बाद बेटे को जिंदा देख बूढ़े पिता के आंखों से छलके आंसू

O- 22 साल बाद अचानक घर वापसी पर आसपास गांव के लोग पहुंचे मिलने

O- पत्नी व बेटे की खुशी की आंसू रुकने को नहीं ले रहे नाम

O- पिता के घर आने की खुशी फोन पर रिश्तेदारों को देने में जुटे परिवार के लोग

सोनभद्र। रामायण काल में जब लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास के बाद लौटे थे, तो उनकी पत्नी उर्मिला की प्रतीक्षा की गाथा इतिहास में अमर हो गई। आज सोनभद्र के देवरी खुर्द गाँव में एक आधुनिक उर्मिला की कहानी लिखी गई, जब 22 वर्षों के अथक इंतजार के बाद एक पत्नी को अपने लापता पति की वापसी का सुखद पल मिला।

देवरी खुर्द निवासी 55 वर्षीय परीक्षित त्रिपाठी की अचानक घर वापसी ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। शादी के 8-9 साल बाद ही परीक्षित नौकरी के सिलसिले में बैढ़न, शक्तिनगर से गायब हो गए थे। वर्षों तक चली खोजबीन के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार ने उनके लौटने की आस छोड़ दी थी। लेकिन उनकी पत्नी ने उर्मिला की तरह अडिग विश्वास बनाए रखा।

जब अचानक 22 साल बाद परीक्षित घर के दरवाजे पर खड़े हुए, तो पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। बूढ़े पिता महेंद्र नाथ त्रिपाठी ने जब अपने बेटे को देखा, तो उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली। पत्नी और बेटे की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, उनके आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

खबर फैतते ही आसपास के गाँवों से लोग उनसे मिलने पहुँचे। घर में ऐसा माहौल बन गया जैसे कोई त्योहार मनाया जा रहा हो। परिवार के सदस्य दूर-दराज के रिश्तेदारों को फोन करके इस सुखद समाचार से अवगत करा रहे हैं।

अभी तक परीक्षित से यह नहीं पूछा गया है कि वह इतने वर्षों तक कहाँ थे और क्यों लौटे हैं। परिवार का मानना है कि जब वह तैयार होंगे, अपनी कहानी खुद बयान करेंगे। फिलहाल, पूरा गाँव इस मार्मिक पुनर्मिलन की गवाही दे रहा है और प्रेम, धैर्य एवं आस्था की इस मिसाल को सलाम कर रहा है।

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