वीरता की मिसाल थीं रानी लक्ष्मीबाई, उनकी गाथा हर महिला के लिए प्रेरणा : पुष्पा सिंह

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अमित मिश्रा

O- रानी लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा को किया याद, महिला मोर्चा ने मनाया बलिदान दिवस


सोनभद्र। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर बुधवार को भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष पुष्पा सिंह के नेतृत्व में उरमौरा स्थित एक आवास पर बलिदान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रानी लक्ष्मीबाई के साहस, संघर्ष और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बताया गया।

पुष्पा सिंह ने कहा कि भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की मशाल एक महिला ने जलाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ जिस वीरता और आत्मबल के साथ युद्ध लड़ा, वह इतिहास के पन्नों में अमर है। उनकी गाथा आज भी हर बच्चे को सुनाई जाती है ताकि उनमें साहस और राष्ट्रप्रेम का संचार हो।

उन्होंने कहा कि 18 जून को रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि के रूप में याद किया जाता है, जब 1858 में ग्वालियर की लड़ाई में उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी। उनकी अंतिम लड़ाई में लिखा गया बलिदान का अध्याय आज भी महिलाओं के आत्मबल और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है।”

कार्यक्रम में पुष्पा सिंह ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन परिचय पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 19 नवम्बर 1828 को बनारस में जन्मी मणिकर्णिका, जिन्हें मनु कहा जाता था, का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ और वे लक्ष्मीबाई बनीं। पुत्र और पति के निधन के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और झांसी की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया। जब अंग्रेजों ने उनके दत्तक पुत्र दामोदर को उत्तराधिकारी मानने से इनकार किया, तो रानी ने घुटने टेकने की बजाय तलवार उठाई और इतिहास रच दिया।

कार्यक्रम में कविता यादव, प्रिया सोनकर, कंचन, श्रेया पांडेय, ऋतु अग्रहरी, प्रतिभा मोहन, खुशी, रानी शर्मा, संगीता और अमृता समेत कई कार्यकर्ता एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
सभी ने रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान को नमन किया और उनके आदर्शों को अपनाने की शपथ ली।

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