आदर्श ग्राम योजना में 107 गांव चयनित, सिर्फ 19 को मिला अधूरा बजट

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पी के चौबे

सोनभद्र। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जनपद सोनभद्र के 107 अनुसूचित जाति बहुल गांवों को विकास कार्यों के लिए चयनित किया गया है। योजना के तहत प्रत्येक गांव में 20 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जाने थे, लेकिन अब तक केवल 19 गांवों को ही बजट मिला है, वह भी आधा। इससे न केवल शेष 88 गांवों का विकास अटका हुआ है, बल्कि जिन 19 गांवों को राशि मिली, वहां भी अधूरे कार्यों से ग्रामीणों को निराशा हाथ लगी है।

विकास की दौड़ में पीछे छूटे गांव

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत उन गांवों को शामिल किया गया है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी 50 फीसदी या उससे अधिक है। इस योजना का उद्देश्य इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन बजट की कमी के चलते यह लक्ष्य अधूरा रह गया है। प्रशासन ने शासन को बजट आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी तक केवल 19 गांवों के लिए ही राशि स्वीकृत हुई है। इससे विकास कार्य अधर में लटक गए हैं।

इन गांवों में जारी है कार्य, लेकिन अधूरा

रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के रामगढ़, सिलथम, सोढ़ा, भीखमपुर, मुबारकपुर, बरवाडीह, खेमपुर, मिठिहिनिया, ओबरा क्षेत्र के जमुई, घोरावल क्षेत्र के नेवारी, शिल्पी, बर, घुवास, कन्हारी, हिनौती, परसौना, पड़वनिया, नेवारी और खुटहां गांवों में कार्य तो शुरू हुए हैं, लेकिन हर गांव को मात्र 10 लाख रुपये मिले हैं। आधी राशि से अधूरे काम पूरे करना मुश्किल हो गया है।

88 गांवों को अब तक नहीं मिली एक भी कौड़ी

योजना के तहत चयनित 107 गांवों में से 88 गांव ऐसे हैं, जहां अब तक बजट जारी नहीं हुआ है। इससे वहां के ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। वे सवाल कर रहे हैं कि जब सरकार ने गांवों को आदर्श बनाने की योजना बनाई थी, तो फिर बजट क्यों नहीं दिया जा रहा है? गांवों के विकास के सपने दिखाए गए, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस हैं।

अधिकारियों ने क्या कहा?

जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने बताया कि जिले में 107 गांवों को आदर्श ग्राम योजना में शामिल किया गया है। अब तक केवल 19 गांवों का बजट आया है और वह भी आधा। बाकी बजट के लिए शासन को अनुरोध भेजा गया है। 88 गांवों को अब तक कोई धनराशि नहीं मिली है। जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, सभी गांवों में विकास कार्य तेजी से शुरू किए जाएंगे।

गांवों के लोगों में बढ़ती नाराजगी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की इस योजना से उन्हें बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन बजट न मिलने से विकास कार्य अधर में लटक गए हैं। अधूरे कामों से ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि जब तक सरकार सभी गांवों को पूरा बजट नहीं देती, तब तक योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब सवाल यह उठता है कि आखिर शेष 88 गांवों को कब तक बजट मिलेगा? क्या सरकार इन गांवों के विकास को लेकर गंभीर है? यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन इस दिशा में कब तक कदम उठाता है और इन गांवों को उनका हक कब तक मिलता है।

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