गुप्तकाशी दर्शन यात्रा पर पधारे साधु-संतों का कोनवासियों ने किया भव्य स्वागत

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नवीन कुमार

O- सावन के पावन मौके पर देशभर से आए संतों ने दिया सनातन धर्म व पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कोन (सोनभद्र) । गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय गुप्तकाशी दर्शन यात्रा के दूसरे दिन मंगलवार को कोन नगर में देशभर से पधारे साधु-संतों का भव्य स्वागत किया गया। डोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयकारों के बीच कोन के दोनों प्राचीन शिव मंदिरों तथा तालाबों पर संतों का अभिनंदन हुआ।

इस यात्रा में श्रीधाम वृंदावन से विश्व के द्वितीय किन्नर कथावाचक श्रीमती हेमलता सखी, अयोध्या, मथुरा एवं वृंदावन के अनेक संत शामिल हुए। उन्होंने मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सनातन धर्म और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। संतों ने गुप्तकाशी के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “हर देवस्थल का संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी है।” यह बात स्वामी वरुण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।

संतों ने इस यात्रा को सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में धर्म और प्रकृति के प्रति सजगता फैलाने का भी सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर कोनवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर संतों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. अभिषेक, अंशुल, अरुण कुमार जायसवाल, श्याम राज गुप्ता (एडवोकेट), डॉ. अशोक निराला, विनय पाठक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रवि प्रकाश चौबे ने की।

सावन माह के इस पावन अवसर पर गुप्तकाशी दर्शन यात्रा क्षेत्रवासियों के लिए पुण्यलाभ का अवसर लेकर आई है। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बताया।

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