बारिश ने लौटाई चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार की रौनक, सुहाने मौसम से वन्य जीवों में भी लौटी जान

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नौगढ़(चंदौली) जून के दूसरे पखवारे में मौसम के बदले मिजाज ने चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार में फिर से रौनक भर दी है। आसमान में छाए बादल और पिछले तीन दिनों से हो रही मानसून पूर्व बारिश ने जहां आम जनजीवन को राहत दी है, वहीं भीषण गर्मी से जूझ रहे वन्य जीवों की सांसे भी लौटी हैं।

विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में बसे इस 96 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले संरक्षित जंगल की हरियाली फिर से चमक उठी है। अप्रैल से शुरू हुई भीषण गर्मी और सूखे झरनों ने राजदरी-देवदरी जैसे आकर्षणों की रौनक छीन ली थी। 42 डिग्री तक पहुंचे तापमान ने सैलानियों को भी रोक दिया था। लेकिन जून में बदले मौसम ने उम्मीदें जगा दी हैं कि यदि मानसून सक्रिय हुआ, तो आने वाले दिनों में पर्यटकों की आमद में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।

वन्य जीवों के लिए राहत भरा समय

बारिश से जहां वन क्षेत्र की हरियाली लहलहा उठी है, वहीं जलस्रोतों में भी पानी आने से वन्य जीवों को राहत मिली है। वर्तमान में चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार में मौजूद वन्य जीवों की संख्या कुछ इस प्रकार है।

गुलदार(तेंदुआ)-3,चिकारा-334,घड़रोज-315,सांभर-331,बारासिंघा-44,भालू-327,चीतल-572,जंगलीसुअर-1663,,बंदर-4560,लंगूर-1919,मगर-37,भेड़िया-13,लकड़बग्घा-292,लोमड़ी-406,सियार-1361,मोर-686,शाही-251

पर्यटकों की संख्या में गिरावट

गर्मी के कारण अप्रैल-मई में सैलानियों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली। अप्रैल से मई तक महज 610 पर्यटक ही वन विहार पहुंचे, जिससे वन विभाग को मात्र ₹30,500 का राजस्व मिला। जून माह में अब तक पर्यटकों की संख्या नगण्य रही है। जबकि बीते वर्ष अप्रैल में 750 और मई में 624 भारतीय सैलानी यहां पहुंचे थे।

यदि मौसम ने इसी तरह साथ दिया, तो आने वाले हफ्तों में चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार की सुंदरता एक बार फिर पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है। मानसून की पहली फुहारों ने न सिर्फ जंगल की तपिश को कम किया है, बल्कि वन्य जीवों और पर्यावरण प्रेमियों को भी राहत की सांस दी है।

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