चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव साफ देखा जा सकता है। सरकार भले ही ‘स्वस्थ भारत’ का सपना साकार करने में जुटी हो, लेकिन नौगढ़ जैसे सीमावर्ती इलाकों की हकीकत इससे उलट है। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में अब तक अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा नहीं मिल सकी है, जिससे क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को करीब 65 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय चंदौली जाना पड़ता है। यह दूरी तय करने में इतना समय लग जाता है कि कई बार मरीजों को एक दिन पहले ही चंदौली पहुंचना पड़ता है और रात वहीं गुजारनी पड़ती है। खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगियों के लिए यह यात्रा बेहद कष्टदायक हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। कस्बा नौगढ़ किसी भी प्रमुख राजमार्ग से सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है। चंदौली की दूरी जहां 65 किमी है, वहीं सोनभद्र जिले का अस्पताल भी करीब 45 किलोमीटर दूर है।
नौगढ़ सीएचसी में वर्तमान में खून, यूरिन, टीबी आदि की जांच की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी हैं। गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगियों को सोनभद्र के लोढ़ी जिला अस्पताल या चंदौली भेजा जाता है, जिससे उनका समय, पैसा और ऊर्जा तीनों ही व्यर्थ होता है। समय पर जांच न हो पाने से कई बार जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं।
जरूरत है कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान ले और जल्द से जल्द नौगढ़ सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था कराए, ताकि क्षेत्र की जनता को राहत मिल सके।







