वेदव्यास सिंह मौर्य
सोनभद्र। रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के सिलथम पटना गांव में मंगलवार को उरांव समाज का प्रमुख पर्व कर्मा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव में उल्लास का माहौल रहा और हर कोई नए परिधान में नजर आया।
कर्मा को उरांव जाति (धांगर) का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। मान्यता है कि यह त्योहार भाई-बहन के अटूट संबंध और खुशहाली का प्रतीक है। जिस प्रकार ईद पर बच्चे-बूढ़े सभी नए कपड़े पहनते हैं, उसी प्रकार कर्मा के दिन भी सभी लोग विशेष परिधानों से सुसज्जित होते हैं।
त्योहार की खासियत रही कि घर-घर में पारंपरिक पकवान पुआ (मालपुआ) बनाया गया। गांव में आए किसी भी मेहमान, चाहे वह परिचित हो या अपरिचित, सभी का स्वागत पुआ खिलाकर किया गया। यही इस पर्व की सामाजिक एकजुटता और भाईचारे की पहचान है।
इस मौके पर बिहार के रोहतास जिले के पिपराडीह पंचायत के मुखिया जोगिंदर उरांव भी अपने परिजनों के साथ शामिल हुए। उनकी मौजूदगी से कार्यक्रम में और भी रौनक बढ़ गई।
ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ कर्मा देवी की पूजा-अर्चना की। देर रात तक गीत-संगीत और नृत्य का दौर चलता रहा।
कर्मा पर्व न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह समाजिक मेल-जोल, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रतीक भी है।







