बेटी प्रियंका की प्रेरक कहानी: भाई-मां को खोने का दर्द झेला, फिर भी पहले प्रयास में UPSC में 79वीं रैंक

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । गाजीपुर जिले की बेटी प्रियंका ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा Union Public Service Commission (UPSC) में पहले ही प्रयास में 79वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है। उनकी सफलता सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार के सहयोग और अदम्य हिम्मत की प्रेरक कहानी है।

साधारण परिवार से असाधारण सफलता

प्रियंका के पिता नीरा राम गाजीपुर में जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी के राजस्व संग्रह अधिकारी के रूप सेवा दे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।

प्रियंका की प्रारंभिक शिक्षा गाजीपुर में हुई। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान Banaras Hindu University (बीएचयू) से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में प्रियंका बीएचयू से फिजिक्स विषय में पीएचडी कर रही हैं।

पढ़ाई के दौरान टूट पड़ा दुखों का पहाड़

प्रियंका की पढ़ाई के दौरान उनके परिवार को गहरे दुखों से गुजरना पड़ा। उनके भाई रितेश उर्फ गोल्डू, जो लखनऊ से पीएचडी कर रहे थे, पीलिया की चपेट में आ गए और उनकी असमय मृत्यु हो गई।

इकलौते बेटे की मौत का सदमा उनकी मां स्वर्गीय शांति देवी सहन नहीं कर सकीं और कुछ ही महीनों बाद उनका भी निधन हो गया। इस तरह प्रियंका के सिर से मां का साया उठ गया और परिवार गहरे शोक में डूब गया।

दुखों को ताकत बनाकर हासिल की सफलता

एक के बाद एक हुए इन दर्दनाक हादसों के बावजूद प्रियंका ने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने दुख को ताकत बनाया और स्वअध्ययन (Self Study) के माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी।

कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC में 79वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि कठिनाइयाँ चाहे जितनी बड़ी हों, हौसले उससे बड़े होने चाहिए।

परिवार और भाइयों का मिला मजबूत सहारा

प्रियंका की सफलता के पीछे उनके परिवार और (बड़े पिता जी के बेटे) भाइयों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

उनके भाई हरीश कुमार, जो सोनभद्र कलेक्ट्रेट में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत हैं, ने प्रियंका की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई और हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया।

वहीं प्रियंका वर्तमान में अपने बड़े भाई अजीत कुमार के साथ रहकर पढ़ाई कर रही हैं। अजीत कुमार जलनिगम वाराणसी में कार्यरत हैं और उन्होंने भी अपनी बहन के सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया।

“डर के आगे जीत है” की मिसाल बनी प्रियंका

प्रियंका के पिता नीरा राम और स्वर्गीय माता शांति देवी के तीन बच्चे थे, दो बेटियां और एक बेटा। बेटे की असमय मृत्यु और मां के निधन के बाद परिवार पर गहरा दुख आया, लेकिन प्रियंका ने हार नहीं मानी और अपने परिवार की उम्मीदों को टूटने नहीं दिया।

आज उनकी सफलता यह साबित करती है कि संघर्ष, परिवार का साथ और अटूट आत्मविश्वास हो तो किसी भी मुश्किल को हराया जा सकता है।

गाजीपुर और सोनभद्र की यह बेटी आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और उनकी कहानी हर उस छात्र-छात्रा को हिम्मत देती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहता है।

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