आकांक्षी जिला में भ्रष्टाचार चरम पर, प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष ने निदेशक पंचायती राज को भेजा पत्र

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नवीन कुमार

O- जनप्रतिनिधियों को किया जा रहा प्रताड़ित, शासन की छवि हो रही धूमिल

कोन (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश सूबे के आदिवासी बाहुल्य, अति पिछड़े जनपद को शासन द्वारा आकांक्षी जिला घोषित किया गया है लेकिन यहाँ की जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत दिखाई देती है। जिले ग्राम पंचायत संगठन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह को पत्र भेजकर जनपद में फैले भ्रष्टाचार व अफसरशाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जिलाध्यक्ष ने निदेशक को लिखे पत्र में कहा है कि जनपद के अधिकतर ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि कम शिक्षित व सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं लेकिन जनपद व ब्लॉक स्तर के अधिकारी उनके साथ सहयोगात्मक व्यवहार के बजाय उपेक्षा और प्रताड़ना का रवैया अपना रहे हैं। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है, बल्कि सरकार की छवि भी आम जनता में खराब हो रही है।

जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि
जिला पंचायतराज अधिकारी जनप्रतिनिधियों व ग्राम प्रधान संगठन के पदाधिकारियों के फोन कॉल तक रिसीव नहीं करते, जिससे संवाद की प्रक्रिया बाधित हो रही है।

यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी भ्रष्टाचार की शिकायत करता है तो निष्पक्ष जांच के बजाय उसे ही फर्जी मुकदमों में फंसाने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।

जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायतों को गंभीरता से न लेकर फर्जी रिपोर्ट लगाकर निस्तारित कर दिया जाता है।

ग्राम पंचायत अधिकारियों के स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर घूसखोरी व सिफारिश के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं। पंचायत स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों, घोटालों व भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों को भी अधिकारीगण मनमाने तरीके से नजरअंदाज कर रहे हैं।

श्री जायसवाल ने निदेशक से मांग किया है कि इन गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों को न्याय मिल सके और शासन की छवि जनता के बीच बेहतर हो

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