मनरेगा से दो वित्तीय वर्ष में खोदे गए 6002 तालाब , अरबो रुपये का घोटाला

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जनपद में मनरेगा योजनान्तर्गत तालाब खुदाई में व्यापक भ्रष्टाचार

जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच टीम गठित

शिकायतकर्ता ने दो ब्लाकों में हुए कार्यो की नजीर देकर जनपद के सभी ब्लाकों में हुए कार्यो के जांच की किया मांग

किचार ग्राम पंचायत में खेत मे बना तालाब

सोनभद्र। जनपद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत हुए लगभग 400 करोड़ रुपये के हुए कार्यो का सीबीआई अभी जांच कर ही रही तब भी भ्रष्ट अधिकारियों में तनिक भी भय नही है। यह आलम तब देखने को मिल रहा है जब देश व प्रदेश में मोदी और योगी की सरकार है जो जीरो टारलेन्स की बात करते है। इतना ही नही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस आदिवासी बाहुल्य जनपद का चयन आकांक्षी जनपद में भी किया गया है। जनपद में रोजगार के अवसर बहुत कम है लोग अपने जीवीको पार्जन के लिये पूर्ण रूप से मजदूरी पर निर्भर है, परन्तु जनपद में तैनात कुछ अधिकारियों द्वारा गरीब मजदूरों के पेट पर भी डाका डाला जा रहा है।

पनारी गांव नाले मे तालाब

मनरेगा योजना में पूर्व के वर्षों में भी लगभग 400 करोड़ रुपये से भी अधिक का भ्रष्टाचार हो चुका है, जिसकी सीबीआई जांच चल रही है। यहाँ शिकायतकर्ता ने दो वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2019 – 2020 में मनरेगा से हुए कार्यो को दर्शाया गया है कि इन वर्षो में जनपद में सूखे की स्थिति को देखते हुये तत्कालीन जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा मनरेगा से 1001 तालाबों की खुदाई / गहरीकरण का कार्य कराया गया, जिसके लिये भारत सरकार द्वारा जनपद को पुरस्कृत भी किया गया था। वही वर्ष 2019-20 में पुनः 5001 तालाबों के गहरीकरण / तालाब खुदाई का कार्य शुरू कराया गया, जो कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इस कार्य को शुरू कराने से पहले ही भ्रष्टाचार का तानाबाना अधिकारियों द्वारा बुन लिया गया तथा जो तालाब वित्तीय वर्ष 2017-18 व 2018-19 में खुदे गये थे, उन्हीं तालाबों को पुनः वर्ष 2018-19 में खुदने का लक्ष्य लिया गया, क्योंकि ये तालाब पहले से ही खुदे थे, जिस पर फजी मस्टरोल बनाया जाना आसान था।

पनारी गांव में बना तालाब
गुरौटी गांव में बेलन नदी का गहरीकरण

जनपद के समाचार पत्रों में 24 जून 2019 को उनके द्वारा एक खबर प्रकाशित की गयी, जिसमें 1800 तालाबों का कार्य पूर्ण दिखाया गया एवं यह भी बताया गया कि 40 हजार से ज्यादे मजदूर तालाब खुदाई में प्रतिदिन कार्य कर रहे है, जबकि हकीकत ये है कि जनपद में इतने तालाब ही नहीं है, जिस पर खुदाई का कार्य दिखाया जा रहा है (जांच की बिन्दू – 1) पूर्व से खोदे हुये बहुत से तालाबों पर जेसीबी मशीन द्वारा सफाई एवं छिछलीकरण कर उस तालाब पर वर्ष 2019-20 से भी कार्य कागज पर कार्य दिखाया गया, जबकि सैकड़ो ऐसे तालाब है, जिस पर मजदूर द्वारा कोई कार्य नहीं किया गया है सिर्फ फर्जी मस्टरोल भरा गया है। बहुत से तालाब ऐसे हैं, जिस पर जेसीबी मशीन के द्वारा कार्य किया गया है, जबकि मनरेगा योजनान्तर्गत लोगों को श्रम लेने की योजना है। इस कार्य में मशीन पूर्णतया प्रतिबन्धित है फिर भी जेसीबी मशीन के द्वारा तालाब खुदवाया गया है। इसकी शिकायत पूर्व में भी कई बार हुयी है परन्तु जिला विकास अधिकारी / तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा द्वारा जांच को दबा दिया जा रहा है।

गुरौटी गांव में बेलन नदी का गहरीकरण

मनरेगा योजना के अन्तर्गत जो तालाब की खुदाई की जाती है, उस तालाब का गहरीकरण तीन वर्ष बाद किये जाने का प्राविधान है, जबकि श्री त्रिपाठी जी द्वारा 5001 तालाब खोदने का लक्ष्य रखा गया क्योंकि जनपद में इतने तालाब ही नहीं है और न खुदे गये तथा वर्ष 2018-19 में जो 1001 तालाब खुदे गये थे उन पर पुनः खुदाई का कार्य दिखाकर फर्जी भुगतान कराया गया है।

पनारी गांव में बना तालाब

तालाब खुदाई में फर्जी भुगतान कर धनराशि का बंदरबाट किया गया। जिला विकास अधिकारी / उपायुक्त मनरेगा श्री रामबाबू त्रिपाठी ने पंचायत सचिव एवं रोजगार सेवकों पर अनुचित प्रेशर बनाकर ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवक व सचिव के चिन्हीत मजदूरों के खाते में मस्टरोल भरकर फर्जी भुगतान कराया गया। उक्त धनराशि में से 40 प्रतिशत धनराशि सम्बन्धित मजदूर को दे दिया गया तथा 60 प्रतिशत की धनराशि का बंदरबाट किया गया, जिसमें 10 प्रतिशत प्रधान, 10 प्रतिशत सचिव 05 प्रतिशत रोजगार सेवक, 5 प्रतिशत तकनीकी सहायक, 5 प्रतिशत ब्लाक कार्यालय, शेष 25 प्रतिशत धनराशि उपायुक्त मनरेगा / जिला विकास अधिकारी श्री रामबाबू त्रिपाठी द्वारा अपने यहां मंगाया गया एवं व्यापक रूप से भ्रष्टाचार किया गया। कुछ उदाहरण निम्नवत् है, जहां व्यापक रूप से भ्रष्टाचार किया गया।

गुरौटी में बेलन नदी की गहरीकरण

जिलाधिकारी से की गई शिकायत में मनरेगा द्वारा हुए कुछ कार्यो में भ्रष्टाचार को उदाहरण देकर बताया गया और इसी तरह जनपद के सभी दसो विकास खंडों में जांच कराने की मांग किया है।

जनपद के विकास खण्ड चतरा के ग्राम पंचायत उंचीखुर्द वर्ष 2018-19 में ग्राम पंचायत उंचीखुर्द में 25.42 लाख रूपये का कार्य कच्चा कार्य कराया गया है, तथा 17.14 लाख रूपये का मैटेरियल वर्क कराया गया है, इसी प्रकार वर्ष 2019-20 में 24.87 लाख का कच्चा वर्क एवं 3.34 लाख का पक्का वर्क कराया गया है। ग्राम पंचायतों में दोनो वर्षों में तीन तालाब का निर्माण कराया गया. जिसका विवरण एवं जांच की बिन्दू निम्नवत् है। ग्राम पंचायत उंचीखुर्द के मझिदड़ में तालाब का गहरीकरण (3163003004/डब्ल्यूसी 958486255822867955) ग्राम पंचायत में यह कार्य 27.11.2017 में शुरू कराया गया इस कार्य पर विभिन्न मस्टरोलों पर वर्ष 2018-19 में 490350.00 खर्च किया गया, जिससे यह तालाब पूर्ण कराया गया था। वर्ष 2019-20 में 34 मस्टररोल के द्वारा 153300.00 का फर्जी भुगतान मजदूरों के खाते में किया गया, जबकि मजदूरों द्वारा शिकायत की गयी कि तालाब पर जेसीबी से छिछला कराया गया है उक्त तालाब पूर्व के वर्ष में भी जेसीबी से खुदवाया एवं वर्ष 2019-20 में फर्जी भुगतान कराया गया है, जिसमें पैसों की बंदरबाट की गयी है। इस प्रकार कुल 3768 मैनडेज दिखाया गया है, जिस पर 659402.00 व्यय किया गया है, जबकि यह तालाब पर लगातार तीन सालों से कार्य कराया जा रहा है।

रिजुल गांव में बना बंधी

वही ग्राम पंचायत उंचीखुर्द के मझिदड़ में तालाब का गहरीकरण नागेन्द्र पुत्र दामोदर के खेत में तालाब (3163003004/WC/958486255823000574) ग्राम पंचायत में यह कार्य 17.06.2019 को शुरू कराया गया इस कार्य पर विभिन्न मस्टरोलों द्वारा 1834 मैनडेज दिखाया गया है। जिस पर 333788.00 रूपये व्यय किया गया है। इस तालाब पर एक भी मजदूर द्वारा कार्य नही कराया गया है, जिसके खेत में तालाब खना गया है। उसके भाई का बयान लेने पर बताया गया कि तालाब जेसीबी मशीन के द्वारा तीन दिन में खना गया है। यह तालाब दूसरे ग्राम पंचायत-जगदीशपुर के राजस्व ग्राम-मझिगवं में खनवाया गया है, जबकि मस्टरोल व भुगतान ग्राम पंचायत उंचीखुर्द से है, जबकि मनरेगा गाईडलाईन के अनुसार दूसरे ग्राम पंचायत का भुगतान नहीं किया जा सकता न ही दूसरे ग्राम पंचायत के मजदूर ही कार्य कर सकते हैं, इस प्रकार इस तालाब पर हुआ कोई भी मजदूर द्वारा कार्य नही कराया गया है तथा जिला विकास अधिकारी / उपायुक्त मनरेगा की मिलीभगत से सचिव व प्रधान द्वारा जेसीबी मशीन से कार्य कराकर पूरे धन का बंदरबाट किया गया है।

नागेन्द्र पुत्र दामोदर के खेत में तालाब (दूसरे ग्राम पंचायत- जगदीशपुर के ग्राम – मझिगवां में बना तालाब

मझिड़ढ़ गांव में बना तालाब

लाभार्थी नागेन्द्र पुत्र दामोदर ने बताया कि मेरे खेत में तालाब बना है। मेरा खेत उंचीखुर्द से 02 किमी दूर जगदीशपुर ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम-मझिगवां में पड़ता है, जो दूसरे ग्राम पंचायत में है। तालाब बनना चाहिये कि नही बनना चाहिये ये प्रधान जाने हमने कहा प्रधान ने बनवा दिया। इस तालाब में मजदूर नही लगे थे सिर्फ 04 दिन में जेसीवी मशीन से ये तालाब खोदा गया था।

दूसरा मामला ग्राम पंचायत उंचीखुर्द के पथरहा में अम्बेडकर मूर्ति के पास तालाब गहरीकरण (3163003004/WC/958486255822878944) ग्राम पंचायत में तालाब के गहरीकरण का कार्य 17 जून 2018 को शुरू कराया गया यह तालाब 2018-19 में पूर्ण करा लिया गया तथा विभिन्न मस्टरोलों से 1872 मैनडेज दिखाया गया है, जिस पर 334404 का व्यय इस तालाब पर व्यय दिखाया गया है, वर्ष 2019-20 में इस तालाब पर 256704.00 पुनः व्यय दिखाया गया है, जबकि यह तालाब अगर 2018-19 में पूर्ण हो गया था तो पुनः 2019-20 में किसी भी मजदूर द्वारा कार्य नहीं किया गया है। सभी मस्टरोल फर्जी दिखाकर पैसे का बंदरबाट किया गया। इस तालाब पर भी जेसीबी मशीन के द्वारा जिला विकास अधिकारी के सह पर कार्य कराया गया एवं पैसे का बंदरबाट जिला विकास अधिकारी / उपायुक्त मनरेगा के सह पर किया गया।

मझिड़ढ़ गांव में बना तालाब

ग्राम पंचायत उंचीखुर्द के पथरहा में अम्बेडकर मुर्ति के पास तालाब गहरीकरण

राजेश, निवासी ग्राम-पथरहा ने बताया कि यह तालाब पहले से खुदा था गर्मी में जे०सी०बी० मशीन से कुछ खुदाई हुयी है. इसमें किसी भी मजदूरों द्वारा काम नहीं किया गया है।

चोपन विकास खण्ड के ग्राम पंचायत- पनारी में कड़िया जगनहा नाले पर बंधी निर्माण (3163005001/WC/958486255822992980) ग्राम पंचायत पनारी में कड़िया जगनहा नाले पर बंधी निर्माण का कार्य 17.08. 2018 से चल रहा है। यह बंधी वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 में ही बन्धी का कार्य पूर्ण हो चुका है। बंधी पूर्ण होने के उपरान्त टूट गयी, जिसको पुनः 2019-20 में नया बंधी निर्माण का कार्य दिखाया गया, जबकि इस बंधी पर निर्माण कार्य पूर्व के वर्षों में ही पूर्ण हो चुका है । इस बंधी में पानी रूकना कदापि संभव नही है और न ही इसे सिंचाई का कार्य किया जा सकता है। तकनीकी रूप से यह बंधी महत्वहीन है। तकनीकी सहायक द्वारा अधिक स्टीमेन्ट बनाकर बंधी पर कार्य कराया जा रहा है, जिस पर अभी तक 3062 मैण्डेज जनरेट कर 536935 रूपये का कार्य किया गया है। इस बंधी निर्माण में फर्जी मस्टरोल भरा गया है उक्त बंधी पर पूरा 536935 रूपये सरकारी धन का बंदरबाट किया गया है।

वही सुरेन्द्र व सिपाही, निवासी कड़िया टोला, ग्राम पंचायत पनारी ने बताया कि यह बंधी 10-15 साल पहले की बनी हुयी है। कुछ टूट गया था। प्रधान व सदस्य ने इसपर मिट्टी डालकर बस काम पूरा कर लिया गया है। इस बंधी से कोई लाभ नही है। खेती व सिंचाई के लिये कोई फायदा नहीं है। हमारे जाब कार्ड पर हाजिरी नही चढ़ाया जाता है।

ग्रामीण रामनाथ व प्रहलाद ने बताया कि यह बंधी हमारी जमीन पर बना है। यह बंधी 15 साल पहले बना था। बाद में कुछ टूट गया, जिसमें इस बार प्रधान ने मिट्टी डलवाकर मरम्मत करा दिया बगल में एक पक्का दिवाल खड़ा किया प्रधान ने इसमें पूरी तरह बेमानी किया है। प्रधान ने इसमें लगभग 12 लाख निकाल लिया है। बंधी में हमारी जमीन भी चली गयी कुछ मिला भी नहीं और न ही हमारी खेत की सिंचाई हो पायेगी। इस बंधी से कोई लाभ नहीं है।

इसी ग्राम पंचायत में रामचन्दर पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब निर्माण (3163005001/IF/958486255822977478) ग्राम पंचायत पनारी में रामचन्दर पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब का निर्माण कराया गया है, जो कार्य 14.05.2019 से शुरू किया गया है एवं इस पर 515 मजदूर कार्य किये हुये दिखाये गये हैं, जिस पर 93478 रूपये का व्यय किया गया है। यह तालाब हरिकेश पुत्र जगरनाथ, नरायण पुत्र जगरनाथ के तालाब के ठीक नीचे ढलान पर बनाया गया है। ये तीनो तालाब पहाड़ी पर नाले में बनाया गया है, जबकि बरसात के दिनों में तीनों तालाबों में पानी नही रूक सकता। पहली ही बरसात में तालाब की दिवार टूट जायेगी एवं इससे रच मात्र भी जमीन की सिंचाई नहीं की जा सकती यह तीनों तालाब सिर्फ पैसों का बंदरबाट करने के लिये बनाया गया है, जबकि वही समतल जमीन उपलब्ध था। इस तालाब को वहां बनाना चाहिये था। तकनीकी सहायक द्वारा इस कार्य में पूर्ण रूपेण मनमानी की गयी तथा उपायुक्त, मनरेगा के सह पर फर्जी स्टीमेट बनाकर पैसे का बंदरबाट किया गया।

वही अमरनाथ पुत्र रामचन्द्र, निवासी टोला-अरंगी, ग्राम पंचायत पनारी हमारा मकान पहाड़ी के उपर है। पहाड़ी में ही नीचे तालाब बना है। हमारे यहां हमारे चाचा हरिनरेश और नरायण के खेत में भी तालाब बना है। हमारे खेत में दोनो तरफ पहाड़ी है। केवल बिच में एक मेड़ बांध दिया गया, जो तालाब बन गया। हमारे तालाब के नीचे हमारे चाचा नरायण का तालाब है। दूसरी तरफ हमारे चाचा हरिनरेश का तालाब है। किसी में पानी नही रूकता है।

इस ग्राम पंचायत में हरिनरेश पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब निर्माण (3163005001/टीएफ/958486255822976684) ग्राम पंचायत पनारी में हरिकेश पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब का निर्माण कराया गया है, जिसमें यह कार्य 2019-20 वित्तीय वर्ष का है। तालाब के निर्माण में व्यापक मैपाने पर अनियमितता बरती गयी है। यह तालाब पहाड़ी पर बनाया गया है। पहाड़ से बहने वाले पानी को गेड़ कर तालाब का स्वरूप दे दिया गया है, जबकि इस तालाब में पानी नहीं है और न ही पानी एकत्रित किया जा सकता है। यह तालाब स्टीमेन्ट के अनुसार खुदाई नहीं की गयी है तथा फर्जी मस्टरोल भरकर 72702 रूपये में लगभग 40000 रूपये का दुरूपयोग किया गया है तथा तालाब भी पूर्ण नहीं है।

नारायण पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब निर्माण(3163005001/IF/958486255822976685) ग्राम पंचायत – पनारी में नारायण पुत्र जगरनाथ के खेत में तालाब का निर्माण कराया गया है, जो कार्य 14.05.2019 से शुरू किया गया है एवं इस पर 560 मजदूर कार्य किये हुये दिखाये गये हैं, जिस पर 101752 रूपये का व्यय किया गया है, यह तालाब भी पहाड़ पर हरिनरेश पुत्र जगरनाथ के तालाब के ठीक नीचे उसी नाले को गेड़कर तालाब का स्वरूप दिया गया है। कहीं से भी यह तालाब नही है। केवल बरसाती नाले को गेड़कर तालाब का नाम देकर फर्जी मस्टरोल भरा गया है, जबकि दो तरफ से पहाड़ है एवं एक तरफ थोड़ा सा मिट्टी की दिवाल खड़ी की गयी है। उक्त तालाब पर पूरा धनराशि बर्बाद किया गया है, जो वसूली योग्य हैं।

रामसिंह के खेत में बाउली निर्माण 63005001/WC/958486255822866237) ग्राम पंचायत पनारी में रामसिंह के खेत में बाउली निर्माण का कार्य 30.04.2018 से शुरू हुआ है, जिस पर विभिन्न मस्टरोलों में 3165 मानव श्रम खर्च दिखाया गया है, जिस पर 553875 रूपये का व्यय किया गया है। यह बाउली की खुदाई नहीं की गयी है। पूर्व में गांव के ग्रामीणों द्वारा घर बनाने के लिये यही से मिट्टी निकाला गया है, जिससे वहां पर गड्ढा बन गया था। उस गड्ढे पर चार दिन जेसीबी मशीन लगाकर खुदाई करायी गयी तथा कुछ मजदूर लगाकर मिट्टी को मेड़ पर चढ़ाया गया है तथा फर्जी मस्टरोल भरकर धनराशि का आहरण किया गया है। स्टीमेट के अनुसार अगर इस बाउली को चेक किया जाय तो वृहद पैमाने पर इसमें अनियमितता की गयी है। इस बाउली निर्माण का चयन भी गलत जगह एवं अपात्र लाभार्थी का किया गया है।

इसी तरह फफराकुण्ड गांव में रामसिंह के खेत में बाउली निर्माण पर रामसिंह ने बताया कि यह तालाब हमारे खेत में अगले वर्ष गर्मी में बना था, जिसमें जे०सी०बी० से कोड़कर मिट्टी मजदूरों से हटायी गयी थी। चार दिन जे०सी०बी० चली थी। अभी इसकी खुदाई बाकी है। वही निर्धन पुत्र मुख्खी के खेत में तालाब निर्माण (3163005001/IF/958486255822986325)

इस प्रकार निर्धन पुत्र मुख्खी के खेत में तालाब निर्माण , गुलाब पुत्र समयलाल के खेत में तालाब निर्माण वही रामविलास निवासी अरंगी टोला, ग्राम पंचायत- पनारी ने बताया कि यह तालाब हमारे खेत में बह रहे नाले पर बनाया गया है। दो तरफ से पहाड़ी है और दो तरफ मेड़ खड़ा कर तालाब बना दिया गया है। पहले बंधी बनाने की बात चल रही थी, लेकिन प्रधान और सेक्रेटरी द्वारा तालाब बना दिया गया। बरसात में इसमें पानी नहीं रुकेगा यह तालाब नाले में है। बरसात में तालाब टूट जायेगा।

इसके साथ ही करिहवा नाले पर बंधी निर्माण मनोज निवासी अरंगी टोला, ग्राम पंचायत – पनारी, चतरा विकास खण्ड के ग्राम पंचायत किचार में मंजू पत्नी मनोज ग्राम पंचायत-किचार

ग्राम पंचायत- किचार में जगरनाथ पुत्र चन्द्रीका के खेत में तालाब का निर्माण 12.02.2019 से शुरू कराया गया है। यह कार्य 2018-19 में ही लिया गया था। यह तालाब 2018-19 में खन दिया गया, परन्तु पुनः 2019-20 में भी यह कार्य दर्शाया गया है। इस कार्य पर 735 श्रम दिवस में 133770 रूपये व्यय किया गया है, जिसमें पूरा फर्जी मस्टरोल भरा गया है एवं धनराशि का बंदरबाट किया गया है। यह तालाब ग्राम पंचायत- बभनियांव में स्थित है, जबकि इसका मस्टरोल व भुगतान ग्राम पंचायत – विचार से किया गया है। मनरेगा गाईडलाईन के अनुसार ग्राम पंचायत में दूसरी ग्राम पंचायत कार्य नहीं करा सकती हैं, परन्तु ग्राम पंचायत-बभनियांव में जो तालाब निर्माण किया गया है उसका ग्राम पंचायत-विचार से फर्जी भुगतान कराया गया है, जबकि बभनियांव में भी तालाब जेसीबी से खुदवाया गया है।

ग्राम पंचायत-विचार में सिकरियाकला में हरिहर पुत्र बवई के खेत में तालाब खुदाई का कार्य 26.12.2009 से शुरू कराया गया है। यह कार्य 2009-10 में ही लिया गया था। यह तालाब 2009-10 में खन दिया गया, परन्तु पुनः 2010-11 में भी यह कार्य दर्शाया गया है। इस कार्य पर 1207 श्रम दिवस में 120700 रूपये व्यय किया गया है, जिसमें 150 के लगभग फर्जी मस्टरोल भरा गया है एवं धनराशि का बंदरबाट किया गया है।

ग्राम पंचायत – गुरौटीखुर्द में मेन रोड से शमसान घाट तक नदी का गहरीकरण का कार्य 03.06.2019 से शुरू कराया गया है। 2019-20 में यह कार्य दर्शाया गया है। इस कार्य पर 1878 श्रम दिवस में 341796 रूपये व्यय किया गया है, जिसमें 300 के लगभग फर्जी मस्टरोल भरा गया है एवं धनराशि का बंदरबाट किया गया है। इस नदी का कोई गहरीकरण का कार्य नहीं किया गया है, केवल 10-15 मजदूर लगाकर नहर की सफाई की गयी है तथा जेसीबी लगाकर मिट्टी खनकर मिट्टी को बेचा गया है एवं नहर की सफाई के नाम पर कई स्टीमेट तोड़-तोड़ कर बनाये गये हैं, जिस पर फर्जी मस्टरोल भरकर भुगतान किया गया है। इस सम्बंध में लल्लू, ग्राम पंचायत सदस्य, गुरौटीखुर्द। इसमें मजदूर से काम नही हुआ है। जेसीबी से खोदा गया है। थोड़ा सा मिट्टी भीटे पर डाल दिया गया है। अधिकारी आये थे। इसकी शिकायत किया पर अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं किये।

ग्राम पंचायत-गुरौटीखुर्द में गनेश के खेत के पास ओमप्रकाश के खेत तक बेलन नदी की सफाई का कार्य 04.07.2019 से शुरू कराया गया है। 2019-20 में यह कार्य या गया है। इस कार्य पर 1092 श्रम दिवस में 198744 रूपये व्यय किया गया है, जिसमें के लगभग फर्जी मस्टरोल भरा गया है एवं धनराशि का बंदरबाट किया गया है। यह कार्य भी फर्जी किया गया है। ग्राम पंचायत में बेलन नदी में कोई गहरीकरण का कार्य नहीं या गया है केवल झाड़ियों को कटवाकर नदी के गहरीकरण का कार्य दिखाया जा रहा है। इस ग्राम पंचायत में कई फर्जी स्टीमेट बनवाकर बेलन नदी की सफाई दिखाया गया है, जबकि यह नहर पहले से ही गहरी है।

ग्राम पंचायत- गुरौटीखुर्द में नदेश्वर के खेत से रमाकान्त के खेत तक नदी सफाई और खुदाई का कार्य (3163003043/WC/958486255823013558) ग्राम पंचायत – गुरौटीखुर्द में नंदेश्वर के खेत से रमाकान्त के खेत तक नदी सफाई और खुदाई का कार्य 05.07.2019 से शुरू कराया गया है। 2019-20 में यह कार्य दर्शाया गया है। इस कार्य पर 1350 श्रम दिवस में 245700 रूपये व्यय किया गया है, जिसमें 200 के लगभग फर्जी मस्टरोल भरा गया है एवं धनराशि का बंदरबाट किया गया है। यह नदी पहले की तरह जैसी थी वैसी ही है। किसी भी नदी का गहरीकरण का कार्य नही कराया गया है। कुछ मजदूर लगाकर झाड़ियों को साफ कराया गया है एवं एक ही नदी का स्टीमेट बार-बार बनवाकर उपायुक्त, मनरेगा / जिला विकास अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार किया गया है।

इस प्रकार जनपद में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1001 तालाब की खुदाई एवं गहरीकरण का कार्य कराया गया, जिसको वर्ष 2019-20 में उपायुक्त मनरेगा / जिला विकास अधिकारी श्री रामबाबू त्रिपाठी द्वारा 5001 तालाब का निर्माण कार्य का लक्ष्य रखकर अभियान चलाया गया। इस अभियान में पूर्व के वर्षों में खुदाई किये हुये तालाब एवं गहरीकरण किये हुये तालाबों को भी कागज पर खुदाई किया हुआ दिखाया गया एवं फर्जी मस्टरोल रोजगार सेवक, सचिव एवं प्रधानों ने अपने चहेते मजदूरों के खातों में धनराशि भेजा गया है। 30 से 40 प्रतिशत धनराशि मजदूरों को देकर शेष धनराशि मजदूरों के खातों से निकलवा लिया गया, जिसको श्री रामबाबू त्रिपाठी के द्वारा करोड़ो रूपये का भ्रष्टाचार किया गया। साथ ही बहुत से तालाब जेसीबी मशीन के द्वारा खुदवाये गये, जबकि मनरेगा में मशीनों से कार्य . पूर्णतया वर्जित है। ग्राम पंचायतों द्वारा दूसरे ग्राम पंचायतों में भी तालाब की खुदाई का कार्य दिखाया गया है एवं उस पर लाखों रूपये का भुगतान किया गया है, जो कि नियमों के विरूद्ध है। श्री रामबाबू त्रिपाठी द्वारा उपायुक्त मनरेगा के पद पर रहते हुये जनपद में करोड़ों रूपये का भ्रष्टाचार किया गया, जो उच्च स्तरीय जांच से सिद्ध हो सकता है एवं इनके द्वारा प्रशासनिक मद के धनराशि में भी सामग्री क्रय में भी व्यापक पैमाने पर कमिशन खोरी के कार्य किया गया है।

मनरेगा से गहरीकरण के लिए खोदी गयी बेलन नदी

जनपद में वर्ष 2019-20 में 5001 तालाबों का जो अभियान चलाया गया था, उस तालाब की सूची एवं पूर्व के वर्ष 2018-19 में जो 1001 तालाबों के गहरीकरण एवं खुदाई का अभियान चला था। इसकी उच्च स्तरीय जांच किया जाना अत्यन्त अवश्यक है।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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