औषधीय खेती के लिए किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

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सोनभद्र। “जलो वहां जहां जरूरत हो, उजालों में चरागों के मायने नहीं होते” इसी मूल मंत्र के साथ फार्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. पंजाब सिंह के नेतृत्व में जनपद के आदिवासियों के कल्याण हेतु विभिन्न प्रकार की गतिविधियां संचालित की जा रही है।

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रायोजित बायोटेक किसान परियोजना फॉर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन में जनपद के अनेक गांवो अक्छोर, चारकोनवा, सोहदाग, गौरही, बट, पसहिंकला एवं मझुई में चलाया जा रहा हैं। इसी क्रम में ग्राम मझुई के आदिवासी किसानों को औषधीय पौधों के खेती का प्रशिक्षण दिया गया था। जिसके उपरांत लाभान्वित किसान के द्वारा सतावर और लेमनग्रास की खेती की गई है।

जिसका प्रक्षेत्र भ्रमण फार्ड फाउंडेशन के वैज्ञानिकों व अधिकारियों द्वारा किया गया। इस मौके पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर संतोष सिंह , काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग व प्लेसमेंट अधिकारी व फार्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ. उमेश सिंह व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी व ट्रस्टी डा. राजेश सिंह के साथ सोन वैली बायो एनर्जी (एफ.पी. ओ.) के निदेशक सत्य प्रकाश पांडे सहित अन्य विशेषज्ञों ने प्याज, औषधीय फसलों के खेतों का भ्रमण किया।

जिसके उपरांत किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं बायोटेक किसान परियोजना के सह अन्वेषक डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि सोनभद्र का आदिवासी क्षेत्र सतावर, लेमन ग्रॉस, अश्वगंधा व सर्प गंधा जैसी अनेक औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल है। ये फसलें वर्षा आधारित क्षेत्रों में कम पानी में भी अधिक उपज देती हैं। इनके उत्पादन में लागत बिल्कुल कम है और लाभ तुलनात्मक रूप से अधिक होता है। डॉ. सिंह ने बताया कि उत्पादन के पश्चात फार्ड फाउंडेशन द्वारा इस क्षेत्र में कार्यरत कृषि उत्पादक संगठन सोनवैली के माध्यम से इसकी मूल्य वर्धन एवं विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है जिससे कि इस क्षेत्र के आदिवासी किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर पा रहे हैं।

फार्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ उमेश सिंह ने आदिवासी किसानों को कृषक उत्पादन संगठन के कार्यशैली के विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदान की और साथ ही भविष्य में फार्ड फाउंडेशन की तरफ से आयोजित होने वाले विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों जैसे – बकरी पालन , मछली पालन, मशरूम पालन जैसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के बारे में बताया व साथ ही साथ आदिवासी महिला किसानों को बायोटेक किसान परियोजना के माध्यम से उत्कृष्ट कार्य करने हेतु प्रदान की जाने वाली फेलोशिप के विषय में भी बताया जिससे कि वो इसके जुड़कर लगातार लाभान्वित हो रहे हैं
। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी व ट्रस्टी डा. राजेश सिंह ने कहा कि किसानो को परंपरागत खेती करने के साथ ही इस परियोजना के माध्यम से नई तकनीक को अपनाने पर जोर देना है जिससे कि वो अपनी आय को बढ़ाए और परिवार को समृद्ध कर सकें। सोन वैली बायो एनर्जी (एफ.पी. ओ.) के निदेशक सत्य प्रकाश पाण्डेय ने किसानो को सतावर और लेमनग्रास के उत्पादन के मुल्यांकन एवं बाजारीकरण के सम्बन्ध में जानकारी दी।

इस मौके पर नागेंद्र त्रिपाठी,राजेश , गुलाब , शंभू व अनिल मौर्य एवं बड़ी संख्या में आदिवासी महिला व पुरुष किसान मौजूद रहे ।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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