अमित मिश्रा
O- कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र में पिता-पुत्र पर गंभीर आरोप
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। जनपद सोनभद्र में सिविल कंस्ट्रक्शन से जुड़े एक बड़े कारोबारी लेन–देन में कूटरचना, छल, कपट, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ठेकेदारी में साझेदारी के नाम पर लिए गए सादे सुरक्षा चेकों को बाद में हथियार बनाकर न केवल अनुचित लाभ अर्जित किया गया, बल्कि झूठे मुकदमों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश भी की गई।
मामले के अनुसार वर्ष 2020 में सूर्य प्रताप सिंह उर्फ पिन्टू और उनके पिता आनन्द प्रताप सिंह ने ठेकेदारी में साझेदारी का प्रस्ताव रखा और बड़े मुनाफे का भरोसा दिलाया। उसी दौरान लोक निर्माण विभाग में वृहद स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई थीं, जिनमें एक स्थानीय कंस्ट्रक्शन फर्म मेसर्स बलदेव सिंह ने प्रतिभाग किया। विश्वास के आधार पर दोनों को साझेदार बनाया गया। निवेश के बदले सुरक्षा के नाम पर भारतीय बैंक, रॉबर्ट्सगंज शाखा के पाँच सादे चेक-संख्या 569949, 569943, 456458, 456457 और 456459 – धरोहर के रूप में लिए गए। यह स्पष्ट रूप से तय था कि इन चेकों को किसी भी स्थिति में भुगतान हेतु प्रस्तुत नहीं किया जाएगा और निवेश राशि लौटने के बाद चेक वापस कर दिए जाएंगे। इसी कारण चेकों पर न तिथि अंकित थी और न ही कोई लिखावट।

आरोप है कि साझेदारी के दौरान चेक, बैंक ट्रांसफर और नकद माध्यम से कुल ₹1.27 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया, जिसके दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। इसके बावजूद बाद में पिता-पुत्र की नीयत बदल गई और सुरक्षा के तौर पर रखे गए सादे चेकों पर स्वयं मेसर्स आनन्द प्रताप सिंह का नाम और मनमानी तिथियां भरकर उन्हें बैंक में प्रस्तुत कर दिया गया, जिससे चेक अनादरित हो गए।

इसके बाद धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दो परिवाद न्यायालय में दाखिल किए गए, जो वर्तमान में न्यायालय अपर सिविल जज (जू0डि0), कोर्ट संख्या-3 में परिवाद संख्या 7817/2025 एवं 7818/2025 के रूप में विचाराधीन हैं। जब न्यायालय से चेकों और बैंक जमा पर्चियों की प्रमाणित प्रतिलिपियां प्राप्त हुईं, तो मामला और संदिग्ध हो गया। दस्तावेजों की वैज्ञानिक जांच हस्तलेख एवं अंगूठाछाप विशेषज्ञ से कराई गई, जिसकी रिपोर्ट दिनांक 20 सितंबर 2025 में यह स्पष्ट निष्कर्ष सामने आया कि जिस व्यक्ति ने बैंक में जमा पर्ची भरी, उसी व्यक्ति ने चेकों पर भी लेखन किया है।

विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर आरोप है कि चेक संख्या 456458, 456459 सहित अन्य चेकों पर कूटरचित तिथियां डालकर 2 मई 2025 अंकित की गईं और आपसी मिलीभगत से अनुचित लाभ अर्जित किया गया। मामले की जानकारी थाना स्तर से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक व्यक्तिगत रूप से और पंजीकृत डाक के माध्यम से दी गई, लेकिन अब तक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया है। साथ ही जान-माल की धमकियां देने की बात भी सामने आई है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि ये आरोप जांच में प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला केवल चेक अनादर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कूटरचना, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में आएगा, जिनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र विवेचना अनिवार्य है। अब निगाहें न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र, पुलिस और प्रशासन पर टिकी हैं कि इस बहुचर्चित प्रकरण में कानून अपना रास्ता कैसे तय करता है।
यह मामला देशभर में व्यापारिक लेन-देन में सुरक्षा चेकों के दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रिया के संभावित दुराचार को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है।







