O- भू-माफिया, प्रशासनिक कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत से फर्जी पट्टा रैकेट
सोनभद्र। जनपद सोनभद्र की सदर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत लसड़ा में सरकारी भूमि पर कब्जे का एक संगठित भू-माफिया रैकेट सामने आया है। आरोप है कि उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय के कुछ कर्मचारियों, स्थानीय भू-माफियाओं और जनप्रतिनिधियों की कथित सांठगांठ से करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को फर्जी पट्टा दस्तावेजों के सहारे हड़पने की साजिश रची गई। ग्रामीणों के अनुसार, एसडीएम के नाम से हस्ताक्षर व सरकारी मोहर लगे फर्जी पट्टा पत्र दिखाकर जमीन पर कब्जा कराया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को कथित तौर पर “जानकारी नहीं” होने का दावा किया जा रहा है, जबकि कागजात पूरी तरह हस्ताक्षरित और मुहरबंद बताए जा रहे हैं-जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

फर्जी दस्तावेजों से कब्जा, पात्र गरीब बाहर
आरोप है कि ग्राम पंचायत लसड़ा में सरकारी पंप हाउस के समीप खड़ंजा पुल के आसपास की सरकारी भूमि पर प्रभावशाली व्यक्तियों ने फर्जी पट्टा कागज दिखाकर कब्जा किया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान रुची पाण्डेय (पत्नी- विमलेश पाण्डेय) तथा लेखपाल श्वेता सिंह की कथित मिलीभगत से धन लेकर पट्टा तैयार कराया गया- बिना ग्राम पंचायत की बैठक, बिना सार्वजनिक सूचना और बिना पात्रता सूची के।
नौजवान किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के साथ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन व्यक्तियों के नाम पर पट्टा दिखाया जा रहा है, वे पहले से भूमिधर हैं, जबकि गांव में 1963 से निवासरत कई गरीब-असहाय परिवार आज तक भूमि अधिकार से वंचित हैं। इससे सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं की मंशा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
एडीएम के निर्देश पर जांच, पर कार्रवाई पर संदेह
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी द्वारा जांच बैठाने की सूचना है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में भी ऐसे मामलों में जांच लंबित रखकर दबा दी गई, जिससे भू-माफिया बेखौफ होकर कब्जे करते रहे।
ग्रामीणों की मांग- कठोर दंड, वैधानिक पट्टा
ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि-
- फर्जी पट्टा रैकेट की स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
- दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, भू-माफियाओं और जनप्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो,
- वास्तविक गरीब व पात्र परिवारों को चिन्हित कर वैधानिक रूप से पट्टा आवंटित किया जाए।
इस अवसर पर रामपति, श्यामलाल, साधना, बबीता, पूनम, संदीप मुसाफिर सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
भू-माफिया नेटवर्क पर बड़ा सवाल
यह प्रकरण केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि सरकारी भूमि की लूट के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला भू-माफिया अपराध, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और गरीबों के अधिकारों के दमन का गंभीर उदाहरण बन सकता है।







