VIP गेस्ट हाउस में बोतलों का अंबार, स्वच्छता के दावों पर उठे गंभीर सवाल

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अभिषेक अग्रहरी

O- ओबरा तापीय परियोजना के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भी दिखी अव्यवस्था

ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा तापीय विद्युत परियोजना के VIP गेस्ट हाउस और VIP कॉलोनी क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें परियोजना प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। जिस परिसर में परियोजना के मुख्यमहाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथियों का आवागमन होता है, वहीं खुले में कचरा और शराब की खाली बोतलों की मौजूदगी व्यवस्था की असल तस्वीर बयां कर रही है।

परियोजना क्षेत्र की साफ-सफाई के लिए हर वर्ष टेंडर प्रक्रिया के जरिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। कागजों में स्वच्छता को लेकर योजनाएं और रिपोर्टें मजबूत नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। VIP गेस्ट हाउस के आसपास फैला कचरा और नशे से जुड़ा अपशिष्ट यह दर्शाता है कि स्वच्छता व्यवस्था केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित होकर रह गई है।

सरकार की ओर से गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद परियोजना परिसर में लगे डस्टबिन औपचारिकता मात्र बनकर रह गए हैं। उनके आसपास हर तरह का कचरा एक साथ फैला होना न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह अव्यवस्था किसी दूरस्थ या उपेक्षित इलाके की नहीं, बल्कि अधिकारियों की सीधी निगरानी वाले VIP क्षेत्र की है। यदि ऐसे संवेदनशील परिसर में शराब की खाली बोतलें और कचरे के ढेर आम दृश्य बन चुके हैं, तो यह प्रशासनिक उदासीनता या लापरवाही की ओर साफ संकेत करता है।

गौरतलब है कि हाल ही में गांधी मैदान प्रांगण की बदहाली और वहां बढ़ती नशे की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे थे, लेकिन उन खबरों के बाद भी परियोजना प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आया। अब VIP क्षेत्र की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि समस्या केवल किसी एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परियोजना क्षेत्र में फैल चुकी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार खुले में कचरा और नशे से जुड़ा अपशिष्ट न सिर्फ प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक माहौल को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ऐसे में यह सवाल और गहराता जा रहा है कि स्वच्छता के नाम पर आवंटित धन आखिर खर्च कहां और कैसे हो रहा है।

सोन चेतना सामाजिक संगठन ने इस पूरे मामले को व्यवस्था की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा है कि यह किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप का विषय नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल है। संगठन का कहना है कि जब VIP गेस्ट हाउस जैसे उच्च-स्तरीय परिसर भी अव्यवस्था से अछूते नहीं हैं, तो आम नागरिकों के इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

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