अमित मिश्रा
O- ग्रामीण भारत की प्यास अभी बाकी
O- सोनभद्र के दूरस्थ आदिवासी इलाक़ों में एक साल बाद भी नहीं पहुँचा नल का पानी, बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ी परेशानियाँ
सोनभद्र। ग्रामीण भारत में पेयजल क्रांति लाने का दावा करने वाली ‘हर घर नल जल’ योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोनभद्र जिले के म्योरपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत खैराही, किरवानी और रनटोला में पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद जल आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग इसे सीधे तौर पर लापरवाही और विभागीय उदासीनता का नतीजा बता रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पाइपलाइन सिर्फ दिखावे के लिए बिछा दी गई—न पानी आया, न कनेक्शन शुरू हुआ। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आज भी कई किलोमीटर दूर झरनों और हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
76 वर्षीय जइतलाल, जिनके घुटनों में गंभीर दर्द है, बताते हैं—
“चलना मुश्किल है, फिर भी पानी के लिए दूर जाना पड़ता है। सरकार ने नल लगाने की बात कही, पर पानी एक बूंद नहीं आया।”
उधर, गांव के अन्य निवासी—राजू, टुडीस, अनिता, अमरिका, अशोक दुबे, फिरोज, प्रशांत सहित कई ग्रामीणों ने योजना को ‘कागज़ पर पूरी, ज़मीन पर अधूरी’ बताया। उनका आरोप है कि कुछ विभागीय अधिकारी भ्रष्टाचार और मनमानी के कारण काम को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं।
गौरतलब है कि यह महत्वाकांक्षी योजना 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई थी और केंद्र सरकार का लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से शुद्ध पानी पहुंचाना था। कई राज्यों में तेज़ी से काम हुआ भी, लेकिन आदिवासी बहुल सोनभद्र का दक्षिणांचल आज भी पानी की आस में है।
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए तत्काल जल आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। अब देखें कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब जागता है और कब तक खैराही सहित आसपास के गांवों में नल से पानी बहने की उम्मीद साकार होगी।







