वृद्धाश्रम की दुर्व्यवस्था देख नाराज हुए सीडीओ, अधिकारियों को दिया दिशा निर्देश

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मुख्य विकास अधिकारी ने वृद्धाश्रम, निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल सलखन व अमृत सरोवर बिल्ली-मारकुण्डी का किया औचक निरीक्षण

सोनभद्र। जिले में स्थित वृद्धाश्रम का आज मुख्य विकास अधिकारी सौरभ गंगवार ने अचौक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मुख्य मार्ग से वृद्धाश्रम जाने वाली मुख्य सड़क से आश्रम तक 100 मीटर कीचड़ व पानी लगा था, जिससे वृद्धावस्था आश्रम में वृद्धजनों को आवागमन में असुविधा होती है। इस पर नाराजगी जताते हुए सीडीओ ने इस सड़क को तत्काल सीसी या इण्टर लाकिंग कराने के निर्देश दिया। इस वृद्धाश्रम में 23 पुरूष व 23 महिला वृद्धजन उपस्थित पाये गये तथा बताया गया कि 4 पुरूष वृद्धाजन दवा लेने हेतु बाहर गये है। उपस्थित लोगों से बात करने पर बताया गया कि मीनू के अनुसार सही ढंग से भोजन मिलता है। वृद्धजनों को एक बड़े हाल में ठहराया गया है। हाल के दीवार में लगी हुई ट्यूबलाईट खराब पायी गयी, निर्देशित किया गया कि लाईट व विद्युत वायरिंग ठीक कराया जाय। हाल को दो भागों में विभक्त कर पुरूष व महिला का वार्ड अलग-अलग बनाया गया है, किन्तु बीच में दरवाजा नहीं लगाया गया है। तत्काल दरवाजा लगाये जाने के निर्देश दिये गये। महिला व पुरूष वृद्धजनों के कक्षों में अलार्म लगाये जाने के निर्देश दिये गये।

जिससे आवश्यकतानुसार अथवा रात्रि के समय किसी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर अलार्म बजाकर देखभाल करने वाले कर्मचारी को सूचना दी जा सके। उपस्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित किया गया कि दाल व चावल की आपूर्ति कहां से हो रही है, उसका विवरण उपलब्ध करावें, जिससे सामग्री की गुणवत्ता एवं उस पर किये जा रहे भुगतान का आंकलन किया जा सके। निरीक्षण के समय कुछ वृद्धजनों द्वारा बताया गया कि उन्हें आॅख के चश्मे के संबंध में समस्या है। जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित किया गया कि मुख्य चिकित्साधिकारी/ आॅख के चिकित्सक से सम्पर्क कर समस्या का समाधान कराकर आख्या प्रस्तुत करें। परिसर में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं पायी गयी। दीवारों पर प्लास्टर नहीं हुआ है। वृद्धजनों के गायन, वादन व पूजा-पाठ हेतु कोई व्यवस्था नहीं है। महिला शौचालय में बरसात का पानी छत से टपकता हुआ पाया गया। पुरूष वृद्धजनों के लिए मूत्रालय की व्यवस्था सही नहीं है। जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वृद्धजनों के रहने हेतु किसी अच्छे विकल्प की तलाश कर अवगत करावें।

बंधी का निरीक्षण करते सीडीओ

निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल सलखन का निरीक्षण किया जहां गोवंश आश्रय स्थल में 60 पशु पाये गये। गो-वंश आश्रय स्थल में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नही है, जिससे पशु की कीचड़ व पानी में रहने को मजबूर है। निर्माणाधीन भूसा गोदाम का निरीक्षण किया गया। भूसा गोदाम में लगायी जा रही स्टील की शीट गुणवत्ता बहुत खराब है। गोशाला के अंदर सीमेंटेड बेंच रखे गये है, जोकि औचित्यपूर्ण नहीं है। खण्ड विकास अधिकारी राबर्ट्सगंज को दूरभाष पर निर्देशित किया गया कि जल भराव की स्थिति को तत्काल ठीक करावें तथा खराब गुणवत्ता की शीट को तत्काल बदलवायें तथा उत्तरायी कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही प्रस्ताविक करें तथा सीमेंटेड बेंच को गो आश्रय स्थल के मध्य रखे जाने का औचित्य बतायें।

पशुओं को खिलाने के लिए हरे चारे की सही व्यवस्था नहीं है, जबकि अधोहस्ताक्षरी द्वारा पूर्व में ही जनपद के समस्त गोशालाओं को चारागाहों से संबद्ध कर हरा चारा उगाने के निर्देश दिये गये है, किन्तु मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सोनभद्र द्वारा इसका सही ढंग से अनुश्रवण नहीं किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सोनभद्र को निर्देशित किया जाता है कि जनपद में क्रियाशील सभी गो-आश्रय स्थलों के बारे में तथ्यात्मक आख्या प्रस्तुत करें कि किस गोशाला के लिए कौन सा चारागाह संबद्ध किया गया है और उसमें कितने क्षेत्रफल में कौन सा हरा चारा उगाया जा रहा है।

बंधी निर्माण कार्य-ग्राम कोटा-भूमि संरक्षण विभाग द्वारा जिला खनन निधि से निर्मित बंधी (कोड संख्या-456) का निरीक्षण किया गया। भूमि संरक्षण अधिकारी, चोपन द्वारा बताया गया कि इस स्थल पर कुल 18 बंधियों का निर्माण कराया गया है, जिस पर रू0 24.00 लाख व्यय किया गया है। निरीक्षण में यह पाया गया कि बंधियों का निर्माण होने से पर्याप्त मात्रा में पानी खेतों तथा नालें में रूका हुआ पाया गया, जिससे जल संचयन, जल संरक्षण एवं भूजल स्तर में वृद्धि होगी। सीडीओ ने मौके पर उपस्थित भूमि संरक्षण अधिकारी, चोपन को निर्देशित किया कि यथाशीघ्र जनपद में कम से कम 100 बन्धियों के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत करें, जिससे अधिकाधिक बंधियों का निर्माण कराकर भूजल स्तर में वृद्धि किया जा सके।

गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण करते सीडीओ

वही बिल्ली मारकुण्डी ग्राम पंचायत में स्थित अमृत सरोवर का निरीक्षण किया गया। इस अमृत सरोवर की प्राकल्लित लागत रू0 10.92 लाख है। मौके पर पाथ-वे का निर्माण कार्य प्रगति पर पाया गया। इस सरोवर के इनलेट के ऊपर स्लैब ढालकर जनता के आवागमन हेतु पाथ-वे का निर्माण कराने हेतु खण्ड विकास अधिकारी, चोपन को निर्देशित किया गया साथ ही फ्लैग प्वाइंट को उंचे चबूतरे पर निर्मित कराने के निर्देश दिये गये। पाथ-वे निर्माण हेतु जो कैम्बर तैयार किया गया है, उसे कम्पैक्ट किया जाए, जिससे पाथ-वे निर्मित होने के बाद घसने की आशंका न रहे। अन्य-निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल से सलखन बाजार तक नहर के पटरी के किनारे जल जीवन मिशन के अन्तर्गत खुदाई करके पाइप लगाया गया है, जिससे जगह-जगह पर इण्टर लाकिंग उखड़ गयी है, परन्तु न तो इण्टरलाकिंग की मरम्मत करायी गयी है और न ही लगभग 02 किमी0 लम्बाई में नहर की पटरी को ठीक किया गया है, जिससे ग्राम वासियों को आवागमन में कठिनाई हो सामना करना पड़ रहा है। प्रभारी अधिकारी जल जीवन मिशन/अपर जिलाधिकारी, नमामि गंगे तथा अधिशासी अभियंता, उ0प्र0 जल निगम इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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