ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण को, बने दो संग्रहालय का अस्तिव खतरे में

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हर्षवर्धन केसरवानी

वर्षों से बंद पड़े स्थलीय संग्रहालय का अस्तित्व खतरे में

-शिवद्वार और मऊ में अवस्थित संग्रहालय वर्षो से बंद पड़े हैं।

-उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग ने कराया था इसका निर्माण।

-बंद ताला देखकर मायूस होते है पर्यटक।

-संग्रहित कलाकृतियों के चोरी चले जाने का बना हुआ है भय।

सोनभद्र। भूतात्विक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक स्थलों से भरपूर जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के शिवद्वार एवं रॉबर्ट्सगंज तहसील के मऊ गांव में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ द्वारा निर्मित स्थलीय संग्रहालय बंद होने के कारण इसके अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
इन संग्रहालयो में ऐतिहासिक अवशेषों का खजाना कहे जाने वाले घोरावल क्षेत्र एवं ऐतिहासिक मऊ गांव के आसपास बिखरे हुए मंदिरों, मूर्तियों व अन्य कलात्मक अवशेषों को संग्रहित किया गया है। स्थापना के कुछ वर्षों तक इन संग्रहालयो का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ द्वारा किया जाता रहा, परंतु अज्ञात कारणों से यह संग्रहालय वर्षो से बंद हैं।
संरक्षण और सुरक्षा के अभाव में मूर्तियों के चोरी चले जाने का भी भय भी बना हुआ है।

शिवद्वार में बना संग्रहालय


इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार- “4 मार्च 1989 को जब जनपद सोनभद्र का अस्तित्व उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर कायम हुआ तभी से जनपद में ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण, संवर्धन एवं पर्यटन विकास हेतु विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा स्थानीय संग्रहालय निर्माण की बात उठाई गई थी और संग्रहालय का निर्माण हुआ।
शिवद्वार संग्रहालय का उद्घाटन 3 अक्टूबर 2009 एवं मऊ संग्रहालय का उद्घाटन 15 नवंबर 2009 को सूबे के संस्कृति मंत्री द्वारा किया गया था। इसके निर्माण के पश्चात मूर्तियों के संग्रहण आदि का कार्य भी उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय जनों द्वारा कराया गया था।
निर्माण के पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा इन संग्रहालयो का संचालन बखूबी किया जाता रहा और पर्यटक, छात्र-छात्राएं एवं जिज्ञासु लोग इन संग्रहालयो में आकर अपना ज्ञान वर्धन करते थे। परंतु अज्ञात कारणों से यह संग्रहालय वर्षों पूर्व बंद कर दिया गया, जिसके कारण संग्रहालय के गेट पर ताला देखकर पर्यटक मायूस होकर लौट जाते हैं। संरक्षण और सुरक्षा के अभाव में इन दोनों संग्रहालयों मे जगह-जगह दरारें आ गई है, खिड़की दरवाजे के शीशे टूट चुके हैं। बेशकीमती मूर्तियां, प्रस्तर कलाकृतियां की चोरी चले जाने का भी भय बना हुआ है।

दीपक कुमार केसरवानी, इतिहासकार


उक्त परिपेक्ष में स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन से मांग किया कि इन दोनों संग्रहालयो को सुव्यवस्थित करा कर आम जनता के लिए खोला जाना चाहिए ताकि शोधार्थियों, विद्यार्थियों, पर्यटको, स्थानीय नागरिकों को संग्रहालय में संग्रहित कलाकृतियों के बारे में जानकारी मिल सके और लोग सोनभद्र के इतिहास से परिचित हो सकें।

Ravi pandey
Author: Ravi pandey

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