अपनी दुर्दशा को आँशु बहाने को मजबूर एकलव्य विद्यालय

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रवि पाण्डेय

सोनभद्र। जनपद में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एकलव्य विद्यालय अपनी दुर्दशा पर आँशु बहा रहा है । करोड़ो खर्च के बावजूद विद्यालय अब तक अस्तित्व में नही आया है। 2011 में मायावती सरकार में शुरू हुए इस विद्यालय के निर्माण पूरे हो चुके है पर सरकारी उदासीनता के वजह से अब तक विद्यालय को खोला नही जा सका अधिकारियों से वजह पूछने पर गोलमोल ही जबाब मिल रहा है। वही तब की सरकार ने विद्यालय के लिए जरूरत के 11.37 करोड़ रुपये दे दिए थे पर बाद में कुछ और धन की मांग हुई जो उपलब्ध करा दिए गए फिर भी आज तक लगभग 11 वर्ष बीत जाने के बावजूद विद्यायल को खोला नही जा सका है।



बता दें कि 2011 में बसपा सरकार में एकलव्य विद्यालय की नींव रखी गई थी। वर्ष 2014 से विद्यालय बनकर तैयार है लेकिन अभी तक संचालन नहीं हो सका है। स्कूल में जनजाति 240 बालक और उतने ही बालिका के लिए कक्षा 6 से 8 तक की आवासीय शिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध है। कोन विकास खंड क्षेत्र के पिपरखाड़ में जनजाति बच्चों के लिए करोड़ों की लागत से बन रहे एकलव्य विद्यालय का संचालन  बच्चों के लिए उपलब्ध संसाधन है फिर भी सरकारी उदासीनता के वजह से आज तक आदिवाशी बच्चों के लिए बने स्कूल संचालित नही किये जा सके।

वही समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने बताया कि विद्यालय के डिमांड के हिसाब से 11 करोड़ 37 लाख रुपये मिले थे पर काम अधूरा रह गया था। जब पूछताछ हुई तो पता चला कि जो भी धन उसमें दिये गए थे वो खर्च हो चुके है और धन की जरूरत है। धन उपलब्ध नही होने की वजह से काम रुका हुआ है। कार्यदायी संस्था ने लगभग 9करोड 60 लाख के धन की डिमांड कर दिया। डिमांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूल शुरु कराने के लिये लखनऊ की टीम को जिलाधिकारी के नेतृत्व निरिक्षण करने के लिये भेजा। संयुक्त टीम ने जिले की टीम के साथ मिलकर 15 जनवरी 2021 को निरीक्षण कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपा। निरिक्षण के दौरान जो भी जरूरत है उस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रही है जल्द ही विद्यालय को संचालित करने का काम शुरू हो जाएगा। विद्यालय को जिलाधिकारी ने (DMF) जिला खनिज निधि से 78 लाख बाउंड्री व 48 लाख हैण्ड पम्प और अन्य जरूरत के लिये धन मुहैया कराया।विद्यायल नवोदय विद्यालय की तर्ज पर सीबीएसई की तर्ज पर चलेगा जसमे लड़के , लड़कियों के रहने व पढ़ने की सारी व्यवस्था होगी।

वही स्थानीय लोगो ने बताया कि विद्यालय 2011 में मायावती सरकार में ही पूरा बन कर तैयार हो चुका था। जो भी धन की मांग थी वो भी मिल चुका था, विद्यालय पूरी तरह से तैयार है पर सरकारी उदासीनता की वजह से करोड़ो रूपये पानी मे जाता दिख रहा है। आदिवासियो के नाम पर बने इस विद्यालय में सारी सुविधाएं उपलब्ध है , लेकिन बच्चों के लिए विद्यालय को अब तक नही खोले जा सके है।

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